डिप्टी सीएम के सामने रो पड़ी आदिवासी महिला; नल की धार देख उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी हुए भावुक, जानिए क्या है पूरा मामला?…NV News
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NV News Bastar : छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और आदिवासी बहुल बस्तर संभाग से विकास और बदलते जनजीवन की एक बेहद भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। रोज सुबह उठते ही अपने घर के आंगन में लगे नल से साफ और स्वच्छ पानी आते देखने की असली खुशी क्या होती है, इसे तोकापाल विकासखण्ड के दुगनपाल गांव की रहने वाली कमली ही बेहतर बयां कर सकती है। बस्तर प्रवास पर पहुंचे प्रदेश के उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री अरुण साव जब जल जीवन मिशन के कार्यों का जमीनी निरीक्षण करने कमली के घर पहुंचे, तो अपने आंगन में लगे नल से आ रहे पानी की धार को दिखाते हुए कमली की आंखें खुशी के मारे डबडबा गईं। बस्तर की एक ग्रामीण महिला के चेहरे पर पानी की सुरक्षा देख उपमुख्यमंत्री भी अपने आंसू नहीं रोक पाए और काफी भावुक नजर आए।
अपने चार दिनों के बस्तर दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव विशेष रूप से जल जीवन मिशन की जमीनी हकीकत और प्रगति देखने ग्रामीण अंचलों में पहुंचे। दुगनपाल गांव में उन्होंने कमली के अलावा और भी कई ग्रामीणों के घरों का रुख किया और वहां सीधे नल से आ रहे शुद्ध पेयजल की व्यवस्था को परखा। जल जीवन मिशन के माध्यम से घर-घर पानी पहुंचने की यह अमूल्य खुशी सिर्फ कमली के चेहरे पर नहीं, बल्कि दुगनपाल की हर उस महिला के चेहरे पर साफ झलक रही थी, जो कल तक पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसती थीं। बस्तर जैसे दूरस्थ और दुर्गम वनांचलों में यह मिशन आधी आबादी यानी महिलाओं के जीवन में एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव लेकर आया है।
गौरतलब है कि बस्तर के इन ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को पीने और निस्तारी के पानी के लिए रोज घंटों कड़ा संघर्ष करना पड़ता था। विशेषकर भीषण गर्मी के दिनों में, जब गांव के पारंपरिक जलस्रोत सूख जाते थे, तब सिर पर पानी के भारी बर्तन (गुंड और घड़े) रखकर महिलाओं का सफर कुछ सौ मीटर से बढ़कर कई किलोमीटर तक लंबा हो जाता था। कुओं और हैंडपंपों पर सुबह से लगने वाली लंबी कतारों के कारण महिलाओं का आधा दिन सिर्फ पानी के इंतजाम में ही बीत जाता था, जिससे उनका पूरा जीवन दुष्कर हो गया था। लेकिन अब घर-घर चालू हुए नलों ने महिलाओं को इस रोज-रोज की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से हमेशा के लिए परमानेंट निजात दिला दी है।
यह योजना महज हर घर तक पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को सहूलियत, सम्मान और सबसे बढ़कर बेहतर सेहत की सौगात दे रही है। घर बैठे शुद्ध पेयजल मिलने से अब महिलाओं का कीमती समय और श्रम बच रहा है, जिसका उपयोग वे अपने बच्चों की अच्छी परवरिश, खेती-बाड़ी और आजीविका के अन्य आर्थिक कार्यों में कर पा रही हैं। इसके साथ ही, प्रदूषित पानी के कारण होने वाली पेट की बीमारियों और त्वचा संबंधी रोगों के खतरों से भी अब ग्रामीणों को मुक्ति मिल गई है। छत्तीसगढ़ में इस मिशन के तहत अब तक 8 हजार 500 से अधिक सफल पेयजल योजनाओं को पूर्ण कर सुचारू संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को सौंपा जा चुका है, जो ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

