“खेत बचाओ अभियान” का शंखनाद: प्राकृतिक खेती और मिलेट्स को मिलेगा बढ़ावा, सुधरेगी मिट्टी की सेहत….NV News
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NV News- Dantewada Khet Bachao Abhiyan: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और आम जनता को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती (Natural Farming) और मिलेट्स (मोटे अनाजों) की खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में एक बेहद महत्वाकांक्षी और कल्याणकारी योजना “खेत बचाओ अभियान” का शुभारंभ किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा तैयार की गई इस रणनीतिक कार्ययोजना का मुख्य लक्ष्य कृषि भूमि की घटती उर्वरता को संरक्षित करना, जैव विविधता को बचाना और किसानों की लागत को कम कर उन्हें समृद्धि की नई राह पर ले जाना है।
कम लागत में अधिक मुनाफा, रसायनों से मिलेगी मुक्ति
विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक खेती मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखती है और इसमें पानी की खपत भी काफी कम होती है। इस पद्धति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उपभोक्ताओं को पूरी तरह से रसायन-मुक्त और जहर-मुक्त पौष्टिक खाद्य उत्पाद प्रदान करती है। इसमें किसानों को बाहर से महंगे रासायनिक खाद या कीटनाशक खरीदने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ती। स्थानीय स्तर पर तैयार जैविक खादों के उपयोग से खेती की लागत में भारी कमी आती है और किसानों का शुद्ध मुनाफा बढ़ जाता है।
जन-आंदोलन बनेगा पारंपरिक बीजों का संरक्षण
दंतेवाड़ा जिले में शुरू हो रहा “खेत बचाओ अभियान” केवल सरकारी योजना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक जन-आंदोलन के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इसके तहत जल संरक्षण, पारंपरिक स्थानीय बीजों के संरक्षण और जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टोरेट और जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कृषि विस्तार अधिकारियों की विशेष टीमें गांवों में तैनात की जा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सुशासन सरकार का विशेष फोकस बस्तर संभाग के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में पारंपरिक और पौष्टिक मिलेट्स (जैसे कोदो, कुटकी, रागी) के रकबे को बढ़ाना है, ताकि वनांचल के किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

