सेवारत शिक्षकों के लिए बड़ी खबर: टेट (TET) परीक्षा के कड़े नियमों में ढील देने की तैयारी में स्कूल शिक्षा विभाग…NV News

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NV News- रायपुर: छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग से सेवारत शिक्षकों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर नियमों में बड़े और व्यावहारिक बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग द्वारा एक नया प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित होने वाली टेट परीक्षा के मौजूदा कड़े नियमों को शिथिल या परिवर्तित कर सकता है। इस संवेदनशील विषय पर विभाग ने सीधे शिक्षक संघों से महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव मांगे हैं, ताकि नई व्यवस्था को पूरी तरह से शिक्षक हितैषी बनाया जा सके।

दरअसल, शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के लागू होने के बाद से प्रमोशन (पदोन्नति) और नई नियुक्तियों में TET को अनिवार्य किया गया था। लेकिन, राज्य के कई ऐसे वरिष्ठ (सीनियर) शिक्षक हैं जो पिछले 15 से 20 वर्षों या उससे भी अधिक समय से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नौकरी के इस पड़ाव पर आकर दोबारा पात्रता परीक्षा (TET) पास करना इन वरिष्ठ शिक्षकों के लिए एक बड़ी व्यावहारिक समस्या बन गया था। इसके कारण कई योग्य शिक्षकों की पदोन्नति भी अटक रही थी। शिक्षक संघों द्वारा लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि सालों से पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षकों को इस परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाए।

शिक्षक संघों की राय से तैयार होगा अंतिम मसौदा

DPI के इस कदम से राज्य के हजारों एलबी संवर्ग (LB Cadre) और वरिष्ठ शिक्षकों में खुशी की लहर है। विभाग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सर्वमान्य बनाने के लिए प्रदेश के प्रमुख शिक्षक संगठनों को पत्र जारी कर उनके लिखित सुझाव आमंत्रित किए हैं।

सीनियर शिक्षकों को मिल सकती है छूट: नए प्रस्ताव में इस बात पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है कि एक निश्चित सेवा अवधि (जैसे 10 या 15 वर्ष) पूरी कर चुके शिक्षकों को पदोन्नति के समय TET की अनिवार्यता से पूरी तरह छूट दे दी जाए।

नियमों का सरलीकरण: यदि पूरी तरह अनिवार्यता खत्म नहीं भी होती है, तो इन-सर्विस (सेवारत) शिक्षकों के लिए विभागीय स्तर पर नियमों को इतना सरल बनाया जाएगा कि उन्हें करियर ग्रोथ में किसी तरह की बाधा का सामना न करना पड़े।

जल्द शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव: शिक्षक संघों से सुझाव मिलने के बाद DPI इस प्रस्ताव का एक अंतिम ड्राफ्ट तैयार करेगा, जिसे मंजूरी के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। कैबिनेट की हरी झंडी मिलते ही यह नया नियम छत्तीसगढ़ में लागू हो जाएगा।

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