Kawardha News: लापरवाह अफसरों पर गिरी गाज! बिना बायोमैट्रिक हाजिरी नहीं मिलेगा वेतन, गायब मिले अधिकारियों को थमाया नोटिस…NV News
Share this
कवर्धा– छत्तीसगढ़ के कवर्धा (कबीरधाम) जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए जिला पंचायत सीईओ ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। हाल ही में किए गए औचक निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यस्थल से नदारद पाए गए, जिसके बाद प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए अनुपस्थित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। जिला पंचायत कार्यालय में समय की पाबंदी और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कर्मचारियों का वेतन सीधे तौर पर उनकी बायोमैट्रिक अटेंडेंस से जोड़ा जाएगा। यानी अब दफ्तर से गायब रहने वाले बाबुओं और अफसरों की जेब ढीली होना तय है।
प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, अब ‘नो वर्क, नो पे’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जा रहा है। कवर्धा जिला पंचायत में अब केवल बायोमैट्रिक मशीन पर दर्ज उपस्थिति को ही आधिकारिक माना जाएगा और उसी के आधार पर मासिक वेतन पत्रक तैयार किए जाएंगे। अक्सर यह शिकायतें मिल रही थीं कि कई कर्मचारी हाजिरी रजिस्टर में दस्तखत कर फील्ड वर्क के नाम पर गायब रहते हैं या ऑफिस देरी से पहुँचते हैं। इस डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम से अब लेटलतीफी और बिना सूचना गायब रहने वाले कर्मचारियों पर लगाम कसी जा सकेगी। अनुपस्थित पाए गए अधिकारियों से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है, संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास की योजनाओं को समय पर पूरा करना और जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण करना है। जिला पंचायत सीईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी शाखा प्रभारियों को सुबह निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। यदि कोई अधिकारी बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय छोड़ता है या बायोमैट्रिक पंच नहीं करता है, तो उसे उस दिन के लिए ‘अनुपस्थित’ माना जाएगा। इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो दूर-दराज के गांवों से अपने काम के लिए जिला मुख्यालय आते हैं और अधिकारियों के न मिलने से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता था।
कवर्धा में हुई इस प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक से पूरे जिले के सरकारी विभागों में हड़कंप मच गया है। सरकार की इस पहल को सुशासन (Good Governance) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बायोमैट्रिक सिस्टम को वेतन से लिंक करने से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि सरकारी धन का दुरुपयोग भी रुकेगा। फिलहाल, नोटिस पाने वाले अधिकारियों के जवाब का इंतजार है, लेकिन प्रशासन के इस तेवर ने यह साफ कर दिया है कि अब काम में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में यह व्यवस्था जिले के अन्य जनपदों और ग्राम पंचायतों में भी कड़ाई से लागू की जा सकती है।
