नक्सल मोर्चे पर नई रणनीति: सरेंडर नक्सली बनेंगे ‘हथियार’, जमीन में दबे IED का करेंगे खात्मा…NV News
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रायपुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ एक बेहद प्रभावशाली और रणनीतिक योजना तैयार की है। अब आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली (सरेंडर नक्सली) सुरक्षाबलों के लिए ‘हथियार’ के रूप में काम करेंगे। ये पूर्व नक्सली, जो कभी संगठन का हिस्सा थे, अब पुलिस और सुरक्षाबलों को उन इलाकों की सटीक जानकारी देंगे जहाँ नक्सलियों ने जमीन के नीचे घातक आईईडी (IED) और स्पाइक होल छिपा रखे हैं। इनकी मदद से सुरक्षाबल अब नक्सलियों के बिछाए मौत के जाल को पहचान कर उसे समय रहते निष्क्रिय कर सकेंगे।
नक्सली संगठन अक्सर सुरक्षाबलों को नुकसान पहुँचाने के लिए घने जंगलों और रास्तों में प्रेशर आईईडी और बम छिपा देते हैं, जिन्हें पहचानना बेहद मुश्किल होता है। सरेंडर कर चुके नक्सलियों को इन इलाकों की भौगोलिक स्थिति और नक्सलियों के ‘बम प्लांट’ करने के पैटर्न की गहरी समझ होती है। प्रशासन का मानना है कि इन लोगों के अनुभव का लाभ उठाकर जवानों की जान बचाई जा सकती है और नक्सल विरोधी अभियानों को अधिक सटीक और सफल बनाया जा सकता है। यह कदम नक्सलियों के सूचना तंत्र को कमजोर करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।
इस नई पहल से न केवल सुरक्षाबलों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा में शामिल होने और समाज की सेवा करने का एक नया अवसर भी मिलेगा। बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में इस रणनीति का परीक्षण शुरू कर दिया गया है, जहाँ स्थानीय पुलिस इन पूर्व नक्सलियों के साथ मिलकर सर्चिंग ऑपरेशन चला रही है। यह रणनीति नक्सलियों के मनोबल को तोड़ने और बस्तर के जंगलों में शांति बहाली की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव मानी जा रही है।
