ज्योति मिशन स्कूल केस: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मुख्य आरोपी फादर जोसेफ को उम्रकैद, मददगार महिला स्टाफ को भी सजा…NV News
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छत्तीसगढ़ के चर्चित ज्योति मिशन स्कूल यौन उत्पीड़न मामले में न्याय की जीत हुई है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, इस घिनौने अपराध में सहयोग करने वाली स्कूल की दो महिला कर्मचारियों को भी 7-7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला साल 2014-15 का है, जब ज्योति मिशन स्कूल की नाबालिग छात्राओं ने फादर जोसेफ पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। जांच में सामने आया था कि स्कूल की दो महिला स्टाफ सदस्य न केवल इस कृत्य के बारे में जानती थीं, बल्कि वे पीड़ित बच्चियों को डराने-धमकाने और आरोपी के पास भेजने में उसकी मदद भी करती थीं।
निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर
इससे पहले निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव या अन्य कानूनी तकनीकी कारणों से आरोपियों को बड़ी राहत दी थी, जिसके खिलाफ शासन और पीड़ितों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और नाबालिगों के साथ हुए अन्याय को देखते हुए कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने माना कि शिक्षण संस्थान में इस तरह की घटना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज के भरोसे का भी कत्ल है।
कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें:
फादर जोसेफ धन्ना स्वामी: पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत दोषी, ताउम्र जेल की सजा।
दो महिला स्टाफ: अपराध को छिपाने और सहयोग करने के जुर्म में प्रत्येक को 7-7 साल की सजा।
जुर्माना: दोषियों पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया गया है, जिसे पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर दिया जा सकता है।
इस फैसले का सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवारों ने स्वागत किया है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक नजीर साबित होगा और अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करेगा।
