छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: अरुणपति त्रिपाठी पर CBI का शिकंजा, 4.91 करोड़ की बेनामी संपत्ति का हुआ खुलासा…NV News

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2,000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। मामले में मुख्य आरोपियों में से एक और पूर्व आबकारी विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा जांच में CBI ने त्रिपाठी के ठिकानों पर नजर रखते हुए 4.91 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति का बड़ा खुलासा किया है। आरोप है कि यह संपत्ति घोटाले की काली कमाई के जरिए रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर निवेश की गई थी।

जांच के घेरे में बेनामी संपत्तियां

CBI की शुरुआती जांच और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिले इनपुट के आधार पर अरुणपति त्रिपाठी के निवेश नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। जांच में सामने आया है कि त्रिपाठी ने आबकारी विभाग में अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए अवैध कमीशन और ‘ऑफ-द-बुक्स’ शराब की बिक्री से करोड़ों रुपये जुटाए थे।

प्रमुख खुलासे: अब तक की जांच में 4.91 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट, आलीशान फ्लैट और कई बैंक खातों में जमा राशि का पता चला है, जिनका मालिकाना हक संदिग्ध है।

CBI की नजर: एजेंसी अब उन लोगों की सूची तैयार कर रही है जिनके नाम पर ये संपत्तियां खरीदी गई थीं। जल्द ही इन बेनामी संपत्तियों को कुर्क (Attach) करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

सिंडिकेट का मास्टरमाइंड?

अरुणपति त्रिपाठी, जो छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के एमडी भी रह चुके हैं, पर आरोप है कि उन्होंने शराब नीति में बदलाव कर एक विशेष सिंडिकेट को लाभ पहुँचाया। ED और CBI दोनों ही इस मामले में उन्हें घोटाले की प्रमुख कड़ी मान रहे हैं। हाल के महीनों में हुई पूछताछ और साक्ष्यों के मिलान के बाद जांच एजेंसियां अब उन ‘बड़े नामों’ तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं जिन्हें इस घोटाले का सीधा लाभ मिला।

विपक्ष और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता इस खुलासे के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, वन विभाग और अन्य विभागों में त्रिपाठी के पिछले कार्यकाल के दौरान हुए फैसलों की भी पड़ताल की जा रही है। CBI की इस सक्रियता ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

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