छत्तीसगढ़ बजट का इतिहास: पहले बजट से जुड़ी रोचक कहानियाँ और सियासी उथल-पुथल…NV News

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छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद वित्तीय आत्मनिर्भरता की ओर पहला कदम साल 2001 में रखा गया था। राज्य का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव ने पेश किया था। अविभाजित मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद, नई राजधानी में बजट पेश करना न केवल एक प्रशासनिक चुनौती थी, बल्कि नए राज्य की प्राथमिकताओं को तय करने का एक ऐतिहासिक अवसर भी था। सिंहदेव को उनकी सादगी और आर्थिक सूझबूझ के लिए आज भी याद किया जाता है।

बजट का इतिहास केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ एक बड़ा सियासी विवाद भी जुड़ा है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक दौर ऐसा भी आया जब बजट की गोपनीयता भंग होने के आरोप में एक कद्दावर मंत्री को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। यह घटना भारतीय संसदीय इतिहास के उन दुर्लभ उदाहरणों में से एक है, जहाँ बजट से जुड़ी तकनीकी चूक या राजनीतिक कारणों से कैबिनेट में इतना बड़ा फेरबदल करना पड़ा।

छत्तीसगढ़ का बजट सफर अब काफी आधुनिक हो चुका है। शुरुआती दौर में जहाँ बजट की कॉपियां भारी-भरकम ब्रीफकेस में आती थीं, वहीं अब राज्य पेपरलेस बजट (E-Budget) की ओर बढ़ चुका है। 2026 के परिप्रेक्ष्य में देखें तो अब तकनीक और डिजिटल इंडिया का प्रभाव साफ नजर आता है, जहाँ टैबलेट के जरिए राज्य का लेखा-जोखा पेश किया जाता है। यह बदलाव राज्य की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।

आगामी छत्तीसगढ़ बजट 2026 से राज्य की जनता को भारी उम्मीदें हैं। कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, हर बार की तरह इस बार भी फोकस किसानों, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचे पर रहने की संभावना है। पुराने अनुभवों और ऐतिहासिक घटनाओं से सबक लेते हुए, सरकार अब वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को सर्वोपरि रख रही है ताकि राज्य की आर्थिक नींव को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।

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