NHRC order: आदिवासी महिला की मौत, NHRC ने छत्तीसगढ़ सरकार को मुआवजा देने का आदेश

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सरगुजा। NHRC order, उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में इलाज में लापरवाही से एक आदिवासी महिला की मौत के मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीरता से लिया है। मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने छत्तीसगढ़ सरकार को मृतका के परिजनों को 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मुआवजा वितरण के बाद उसकी रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यह भी छूट दी है कि राज्य सरकार चाहे तो इलाज में लापरवाही बरतने वाले संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों से यह राशि रिकवर कर सकती है।

 

प्रशासनिक कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुआ आयोग

tribal woman death,आयोग ने अपने आदेश में कहा कि प्रशासनिक स्तर पर की गई कार्रवाई मानवाधिकार उल्लंघन की गंभीरता के अनुरूप नहीं है। यह सरगुजा जिले का पहला मामला है, जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने किसी पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया है।

 

क्या है पूरा मामला

tribal woman death, 28 जुलाई 2024 को दरीपारा, अंबिकापुर निवासी शांति मरावी (55 वर्ष) की मेडिकल कॉलेज अस्पताल, अंबिकापुर में मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप था कि महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने शराब सेवन और गर्मी का हवाला देते हुए दो बार भर्ती करने से मना कर दिया।

तीसरी बार जब महिला को अस्पताल लाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसकी मौत हो गई।

 

पार्षद आलोक दुबे की शिकायत पर हुई कार्रवाई

tribal woman death, अंबिकापुर नगर निगम के पार्षद आलोक दुबे ने 1 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखकर मामले की जांच, दोषी अधिकारियों एवं स्टाफ पर कार्रवाई तथा मृतका के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की थी।

 

tribal woman death, आयोग ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट तलब की थी। जिला प्रशासन द्वारा 15 जनवरी 2025 को रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानकारी दी गई।

हालांकि, शिकायतकर्ता पार्षद आलोक दुबे ने आयोग को भेजे अपने जवाब में कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।

 

NHRC का अहम फैसला

tribal woman death, आयोग ने माना कि मृतका अनुसूचित जनजाति से थीं और उनकी मृत्यु सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय लापरवाही के कारण हुई। इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए आयोग ने राज्य सरकार को मुआवजा देने का आदेश दिया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने निर्देश दिया है कि 24 जनवरी 2026 तक आदेश के पालन की रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए।

 

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