CG Ambulance Racket: एंबुलेंस चालकों का धोखा और अस्पताल की उगाही, पीड़ित परिवार बेहाल…NV News

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बिलासपुर/(CG Ambulance Racket): बिलासपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ सड़क दुर्घटना में घायल युवक को सरकारी अस्पताल ले जाने का झांसा देकर एक एंबुलेंस चालक ने निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। कमीशन की लालच में किए गए इस छल का परिणाम यह हुआ कि,गरीब परिवार को इलाज के लिए अपना घर और खेत तक बेचने पड़े, फिर भी अस्पताल प्रबंधन रूपयों की लगातार मांग कर रहा है।

कोरबा निवासी दुर्गेश कुमार सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सूचना मिलने पर उनकी मां पूनी बाई पाटले स्थानीय 100 बिस्तर वाले सरकारी अस्पताल पहुंचीं। वहाँ डॉक्टरों ने दुर्गेश को बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर स्थित सिम्स (श्री अरबिंदो मेडिकल साइंसेस इंस्टिट्यूट) रेफर किया। मां अपने बेटे की गंभीर हालत से घबराई हुई थीं, ऊपर से वे पढ़ी-लिखी भी नहीं हैं। ऐसे में अस्पताल के स्टाफ की सहायता से उन्होंने एक एंबुलेंस मंगवाई और बेटे को लेकर बिलासपुर के लिए रवाना हो गईं।

यहीं से शुरू हुआ असली खेल:

परिवार को सरकारी अस्पताल सिम्स ले जाने का भरोसा देकर एंबुलेंस चालक ने रास्ता बदल दिया। चालक ने घायल दुर्गेश और उनके परिजनों को यह कहते हुए आश्वस्त कर दिया कि, “व्यापार विहार का स्वामी विवेकानंद हॉस्पिटल भी सरकारी ही है।” परिवार को इसकी सच्चाई का कोई अंदाज़ा नहीं था और भय व जल्दबाज़ी में वे उसी पर भरोसा कर बैठे।

अस्पताल में भर्ती होने के बाद तुरंत दुर्गेश का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद जैसे ही अस्पताल प्रबंधन ने पैसों की मांग शुरू की, परिवार को शक हुआ। जब पूनी बाई ने आयुष्मान कार्ड दिखाया तो अस्पताल ने साफ कह दिया- “यहाँ आयुष्मान कार्ड नहीं चलता।” तभी परिजनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

पूनी बाई ने बताया कि,ऑपरेशन के तुरंत बाद अस्पताल ने लगभग दो लाख रुपये जमा करने को कहा। बेटे की जान बचाने की मजबूरी में उन्होंने अपना छोटा मकान बेच दिया और अस्पताल को रकम दे दी। लेकिन उसके बाद भी पैसों की मांग रुकने का नाम नहीं ले रही थी। दुर्गेश की बहन दुर्गा जगत ने बताया कि आगे के उपचार के नाम पर उन्हें फिर चार लाख रुपये जमा करने पड़े, जिसके लिए उन्होंने खेत बेच दिया।

सब कुछ बेचकर भी राहत नहीं मिली। अस्पताल प्रबंधन अब परिवार से 55 हजार रुपये और मांग रहा है और चेतावनी दे रहा है कि,पैसे जमा न करने पर उपचार रोक दिया जाएगा। मजबूर परिवार ने कलेक्टर कार्यालय जाकर गुहार लगाने की कोशिश की, लेकिन रविवार होने के कारण कार्यालय बंद था और वे निराश होकर लौट आए।

दुर्गा जगत ने बताया कि,उनकी मां न तो पढ़ी-लिखी हैं और न ही ठीक से देख पाती हैं। ऐसे में एंबुलेंस चालक ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाया। परिवार को अब साफ समझ आ गया है कि, यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक संगठित एंबुलेंस–कमीशन रैकेट का हिस्सा है। उनका कहना है कि, कई एंबुलेंस चालक सरकारी अस्पताल ले जाने की बजाय मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचाकर मोटा कमीशन कमाते हैं।

परिवार का आरोप है कि, 108 और 112 जैसी आपातकालीन सेवा की आड़ में कई चालक निजी अस्पतालों से सांठगांठ कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों की तरफ जाने का दिखावा कर मरीजों को निजी संस्थानों में पहुंचा दिया जाता है। गरीब परिवार, जिन्हें सरकारी योजनाओं पर भरोसा होता है, सबसे अधिक इस चाल का शिकार बनते हैं।

दुर्गेश की मां और बहन अब पूरी तरह टूट चुकी हैं। घर और खेत बेचकर वे पहले ही बेघर हो चुकी हैं, और जिनके स्कूल में मां ने अस्थायी रूप से शरण ली थी, अब वह भी उन्हें वहां रहने नहीं दे रहा है। ऊपर से अस्पताल की लगातार पैसों की मांग और उपचार रोकने की धमकी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

परिवार ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि,यदि समय रहते किसी अधिकारी की मदद मिली होती, तो शायद उन्हें अपनी जीवनभर की कमाई बेचनी न पड़ती। वे चाहती हैं कि, इस मामले की जांच हो और एंबुलेंस–अस्पताल के इस अवैध गठजोड़ पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि कोई और परिवार ऐसा दर्द न झेले।

यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि,गरीब और अनजान परिवार किस तरह शोषण का शिकार बन जाते हैं। अब पीड़ित परिवार को प्रशासन से उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और दुर्गेश का उपचार बिना किसी बाधा के पूरा हो सकेगा।

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