अमेरिका-ईरान वार्ता: पर्दे के पीछे से कौन निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका?…NV News

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रायपुर (एजेंसी): साल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच ‘बैक-चैनल’ कूटनीति के जरिए शांति वार्ता की खबरें सुर्खियों में हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का अभाव है, लेकिन पर्दे के पीछे से संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

वार्ता का मुख्य तंत्र: ‘कौन’ है वह शक्ति?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ “बेहद अच्छी बातचीत” का दावा किया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है कि वे ईरान के किस ‘शीर्ष अधिकारी’ से संपर्क में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह बातचीत किसी एक व्यक्ति तक सीमित न होकर, ईरान के सत्ता तंत्र (Power Structure) और मध्यस्थों (Intermediaries) के माध्यम से हो रही है:

पाकिस्तान की भूमिका: ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान इस बार अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ के रूप में उभरकर सामने आया है। दोनों देशों के प्रतिनिधि इस्लामाबाद में बैठकर बातचीत कर रहे हैं, जो एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रगति मानी जा रही है।

सरकारी चैनल बनाम सैन्य गुट: ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने वार्ता में ‘प्रगति’ की पुष्टि की है, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि बुनियादी मतभेद (विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु नीति) अभी भी कायम हैं। अमेरिका के लिए चुनौती ईरान के उस गुट से संवाद करना है, जिसके पास निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति है, जबकि ईरान अपनी घरेलू राजनीति और ‘कट्टरपंथी’ गुटों के दबाव को संतुलित करने में जुटा है।

अमेरिका की रणनीति: ‘दबाव और संवाद’

अमेरिका एक साथ दोहरी नीति अपना रहा है:

सैनिक दबाव: होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए तेहरान पर दबाव बनाए रखना।

कूटनीतिक विकल्प: बातचीत के दरवाजे खुले रखना ताकि संघर्ष को पूर्ण युद्ध में बदलने से रोका जा सके।

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