ट्रंप का ‘टैरिफ प्लान’: क्या है 10% ग्लोबल टैरिफ और भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या होगा असर? – एक विश्लेषण…NV News

Share this

वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को धार देते हुए एक बड़े आर्थिक फैसले का संकेत दिया है। ट्रंप ने अमेरिका में आयात होने वाले सभी विदेशी सामानों पर 10% से 20% तक का ‘यूनिवर्सल बेसलाइन टैरिफ’ लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस फैसले का उद्देश्य अमेरिकी घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना और व्यापार घाटे को कम करना है, लेकिन इसने भारत सहित दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है।

क्या है 10% ग्लोबल टैरिफ?

आसान शब्दों में कहें तो, वर्तमान में अमेरिका में आयात होने वाले कई उत्पादों पर बहुत कम या शून्य शुल्क लगता है। ट्रंप की योजना के अनुसार, अब अमेरिका आने वाले हर विदेशी सामान पर कम से कम 10% का अतिरिक्त सीमा शुल्क (Customs Duty) लगेगा। यह एक तरह का ‘प्रवेश शुल्क’ होगा जिसे अमेरिकी आयातकों को भुगतान करना होगा, जिससे विदेशी सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे।

क्या भारत पर भी लागू होगा इतना ही टैरिफ?

हाँ, ट्रंप का यह प्रस्ताव ‘ग्लोबल’ है, जिसका मतलब है कि यह चीन के साथ-साथ भारत, यूरोपीय संघ और अन्य सभी देशों पर समान रूप से लागू हो सकता है। भारत के लिए यह अधिक चिंताजनक इसलिए है क्योंकि:

प्रमुख व्यापारिक भागीदार: अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। भारत अमेरिका को बड़े पैमाने पर आईटी सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां), रत्न-आभूषण और टेक्सटाइल निर्यात करता है।

ट्रेड सरप्लस: भारत उन देशों में शामिल है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा (Trade Deficit) है, यानी भारत अमेरिका को सामान बेचता ज्यादा है और वहां से खरीदता कम है। ट्रंप पहले भी भारत को ‘टैरिफ किंग’ कह चुके हैं।

भारत के किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर?

आईटी सेक्टर (IT Services): भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के लिए लागत बढ़ सकती है।

फार्मा (Pharmaceuticals): जेनेरिक दवाओं के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगने से भारतीय कंपनियों का मुनाफा कम हो सकता है।

कपड़ा और रत्न (Textiles & Jewelry): ये क्षेत्र मार्जिन पर काम करते हैं, 10% अतिरिक्त शुल्क इन्हें ग्लोबल मार्केट में पीछे छोड़ सकता है।

विशेषज्ञों की राय: जानकारों का मानना है कि भारत इस स्थिति का फायदा ‘ट्रेड नेगोशिएशन’ (व्यापारिक बातचीत) के जरिए उठा सकता है। चूंकि अमेरिका चीन पर 60% तक टैरिफ लगाने की बात कर रहा है, ऐसे में भारत खुद को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में पेश कर सकता है, बशर्ते वह अपनी आयात नीतियों में कुछ लचीलापन दिखाए।

Share this

You may have missed