सल्फी को मिली नई पहचान: हर्षवर्धन का अनोखा प्रयोग, अब बोतलों में बंद होकर दुनिया तक पहुंचेगा बस्तर का स्वाद…NV News

Share this

NV News- छत्तीसगढ़ के बस्तर की पहचान यहाँ की संस्कृति और प्राकृतिक उत्पादों से है, जिसमें ‘सल्फी’ (बस्तर की बीयर) का विशेष स्थान है। अब तक केवल पेड़ों के नीचे या स्थानीय हाट-बाजारों तक सीमित रहने वाली सल्फी को बस्तर के युवा हर्षवर्धन ने एक नई और वैश्विक पहचान देने की ठानी है। हर्षवर्धन के इस अनोखे प्रयोग ने सल्फी को न केवल संरक्षित करने का काम किया है, बल्कि इसे एक आधुनिक ब्रांड के रूप में पेश करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस नवाचार से बस्तर के पारंपरिक पेय को अब एक नया बाजार मिलने की उम्मीद जग गई है।

हर्षवर्धन ने अपनी वैज्ञानिक सोच और स्थानीय संसाधनों के मेल से सल्फी के संरक्षण (Preservation) की तकनीक पर काम किया है। आमतौर पर सल्फी पेड़ से निकलने के कुछ ही घंटों बाद खमीर उठने के कारण खराब होने लगती है, लेकिन इस प्रयोग के जरिए इसके स्वाद और गुणवत्ता को लंबे समय तक बरकरार रखने का प्रयास किया गया है। हर्षवर्धन का लक्ष्य है कि बस्तर के दूरस्थ अंचलों में पाए जाने वाले इस अमृत तुल्य पेय को हाइजीनिक तरीके से प्रोसेस कर बोतलों में बंद किया जाए, ताकि देश-दुनिया के लोग बस्तर के इस अनूठे स्वाद का अनुभव ले सकें।

इस पहल से न केवल सल्फी को नई पहचान मिल रही है, बल्कि स्थानीय आदिवासियों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी खुल रहे हैं। हर्षवर्धन का यह प्रयोग ‘लोकल फॉर वोकल’ का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है, जहाँ बस्तर की पारंपरिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आर्थिक मजबूती प्रदान की जा रही है। बस्तर के इस युवा उद्यमी के प्रयास की अब चारों ओर सराहना हो रही है, और माना जा रहा है कि आने वाले समय में सल्फी बस्तर के पर्यटन और अर्थव्यवस्था का एक मुख्य स्तंभ बनकर उभरेगी।

Share this

You may have missed