विश्व पर्यटन मानचित्र पर चमकेगा सिरपुर: एकीकृत विकास परियोजना को मिली रफ्तार, सुरंग टीला में शुरू होगा लाइट एंड साउंड शो….NV News

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NV News रायपुर। छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर सिरपुर को वैश्विक पटल पर एक विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। मंत्रालय में पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन की अध्यक्षता में आयोजित ‘सिरपुर एकीकृत विकास परियोजना’ संबंधी अंतर्विभागीय समिति की द्वितीय उच्चस्तरीय बैठक में कई क्रांतिकारी निर्णय लिए गए। बैठक में सिरपुर को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व विरासत सूची (मिश्रित श्रेणी) में शामिल कराने के प्रस्ताव को जल्द अंतिम रूप देने और इसकी समृद्ध बौद्ध, जैन व हिंदू विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करने के लिए सभी विभागों को समय-सीमा के भीतर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

सिरपुर आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण और सुविधाओं को बढ़ाने के लिए बैठक में कई नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी गई है। इसके तहत सिरपुर के प्रसिद्ध सुरंग टीला में अत्याधुनिक ‘लाइट एंड साउंड शो’ विकसित किया जाएगा, जिसकी स्क्रिप्ट में चीनी यात्री ह्वेनसांग की यात्रा, कलचुरी काल, वीर नारायण सिंह और लोरिक-चंदा जैसे ऐतिहासिक प्रसंग शामिल होंगे। इसके अलावा, एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए कोडार डैम और रायकेश तालाब में स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से बांस राफ्टिंग, नौकायन और कैंटीन संचालन जैसी गतिविधियां शुरू की जाएंगी। पर्यटकों की सहूलियत के लिए स्थानीय गाइडों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा और लक्ष्मण मंदिर परिसर के पास सुव्यवस्थित पार्किंग, कैफेटेरिया व शौचालय जैसी अधोसंरचनाओं का विकास होगा।

बैठक में सिरपुर महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने और दक्षिण एशियाई देशों के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए विशेष रणनीति बनाने पर सहमति बनी। साथ ही, राज्य स्तरीय संग्रहालय को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने के लिए जुलाई में अधिकारियों की टीम ओडिशा के कोणार्क और तमिलनाडु के केलडी संग्रहालयों का अध्ययन भ्रमण करेगी। एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में, विदेशों में पहुंचे सिरपुर के दुर्लभ पुरावशेषों को वापस भारत लाने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। महासमुंद जिला प्रशासन को एक महीने के भीतर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भूमि आवंटित करने और सुरंग टीला क्षेत्र को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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