रायपुर महापौर की बड़ी मांग: ‘व्यावसायिक श्रेणी से बाहर हो नगर निगम, 7.35 के बजाय 5.10 रुपये हो बिजली की दर’…NV News

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रायपुर: रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग की सलाहकार समिति की बैठक में शहरवासियों के हित में एक बड़ा मुद्दा उठाया है। महापौर ने दो टूक शब्दों में कहा कि नगर निगम एक जनसेवी संस्था है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य नागरिकों को सेवा देना है, न कि मुनाफा कमाना। उन्होंने आयोग से मांग की है कि नगर निगम को ‘व्यावसायिक दर श्रेणी’ (Commercial Category) से बाहर रखा जाए, ताकि जनता पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।

महापौर ने बैठक में स्पष्ट किया कि नगर निगम शहर में स्ट्रीट लाइट, वाटर पंप और सार्वजनिक शौचालयों जैसी अनिवार्य सेवाएँ प्रदान करता है। इन सेवाओं पर पावर कंपनी द्वारा कमर्शियल टैरिफ लगाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्युत विभाग को एक विशेष ‘पब्लिक यूटिलिटी स्लैब’ (Public Utility Slab) बनाना चाहिए, जिसकी दरें घरेलू (Domestic) दरों के समान हों। उन्होंने वर्तमान 7.35 रुपये प्रति यूनिट की दर को घटाकर 5.10 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव रखा।

मूलभूत सेवाओं पर बढ़ते आर्थिक बोझ की चिंता

श्रीमती मीनल चौबे ने नियामक आयोग के समक्ष तर्क दिया कि भारी-भरकम बिजली बिलों के कारण नगर निगम के बजट का बड़ा हिस्सा इसी में खर्च हो रहा है। इसके चलते सफाई और पानी जैसी आवश्यक नागरिक सेवाओं के बजट में कटौती करने की नौबत आ रही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम को ‘ग्रास सब्सिडाइजेशन’ श्रेणी से बाहर रखना समय की मांग है।

जनता की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

महापौर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वर्तमान में नगर निगम रायपुर पर लगभग 300 करोड़ रुपये का बिजली बिल और 50 करोड़ रुपये का सरचार्ज बकाया है। यदि बिजली दरों में राहत नहीं मिली, तो अंततः इसकी वसूली यूजर चार्ज और संपत्तिकर के माध्यम से जनता की जेब से ही करनी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर दरों में राहत मिलती है, तो निगम उन पैसों का उपयोग अन्य विकास कार्यों और बिजली बचत की आधुनिक तकनीकों में कर पाएगा।

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