खारुन तट पर सज गया विदेशी मेहमानों का मेला: थाईलैंड वियतनाम से आए हजारों पक्षी, ठकुराइन टोला बना नया आशियाना… NV News

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NV News- Migratory Birds in Raipur: राजधानी रायपुर में मानसून की अधिकारिक दस्तक से ठीक पहले एक बेहद खूबसूरत और विहंगम प्राकृतिक नजारा देखने को मिल रहा है। रायपुर के समीप खारुन नदी के तट पर बसे पाटन क्षेत्र का छोटा सा गांव ‘ठकुराइन टोला’ इन दिनों अंतरराष्ट्रीय और अनोखी प्राकृतिक हलचल का मुख्य केंद्र बन गया है। थाईलैंड, वियतनाम और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों से हजारों किलोमीटर की लंबी और थका देने वाली उड़ान भरकर आए प्रवासी पक्षियों ‘एशियन ओपनबिल स्टॉर्क’ (Asian Openbill Stork) ने इस गांव को अपना अस्थायी बसेरा बना लिया है। मई-जून के तपते महीने में इन विदेशी मेहमानों का यहां पहुंचना अब इस गांव की वैश्विक पहचान और क्षेत्र में मानसून के आगमन का सबसे शुभ संकेत बन चुका है।

सिर्फ प्रवास नहीं, प्रजनन और वंश बढ़ाने आते हैं ये पक्षी

पक्षियों के जानकारों और पर्यावरणविदों ने बताया कि ये विदेशी पक्षी यहां केवल कुछ दिन ठहरने या आराम करने के लिए नहीं आते, बल्कि यह समय उनके प्रजनन (Breeding Season) का होता है। खारुन नदी का तटीय इलाका, प्रचुर मात्रा में भोजन (जैसे घोंघे और छोटे जीव) और ठकुराइन टोला गांव के ऊंचे-हरे-भरे पेड़ इन पक्षियों के अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं। यहां आकर ये पक्षी घोंसले बनाते हैं, अंडे देते हैं और बच्चों के बड़े होने तक यहीं रहते हैं। यही वजह है कि गांव के आसमान में इन दिनों हजारों विदेशी पक्षियों की कतारें और उनकी चहचहाहट प्रकृति का एक अद्भुत और जादुई संगीत बिखेर रही है।

पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा गांव, सुशासन और कलेक्टोरेट की नजर

विदेशी पक्षियों के इस महाजुटान की खबर फैलते ही राजधानी रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के बर्ड लवर्स (पक्षी प्रेमी) और पर्यावरणविद भारी संख्या में ठकुराइन टोला पहुंचने लगे हैं। कलेक्टोरेट और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए पक्षियों की सुरक्षा और शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की सुशासन और पर्यावरण संरक्षण नीति के तहत इस गांव को एक प्रमुख ‘इको-टूरिज्म’ (Eco-Tourism) केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। ग्रामीणों ने भी इन मेहमान पक्षियों को अपना परिवार मान लिया है और वे इनकी सुरक्षा में चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं।

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