Every third daily wage labourer commits suicide: NCRB रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, आत्महत्या करने वालों में हर तीसरा दिहाड़ी मजदूर- NV News
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N.V.News दिल्ली: Every third daily wage labourer commits suicide: भारत (India) में बढ़ती आत्महत्या (Suicide)की घटनाओं को लेकर आई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताज़ा रिपोर्ट 2024 ने एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ी संख्या दिहाड़ी मजदूरों (Daily Wages Worker) की रही है। आंकड़ों के मुताबिक, हर तीन आत्महत्या के मामलों में एक व्यक्ति दिहाड़ी मजदूर था, जो समाज के आर्थिक रूप से सबसे कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है।
यह स्थिति केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश के श्रमिक वर्ग की कठिन और अस्थिर जिंदगी की सच्चाई को उजागर करती है। दिहाड़ी मजदूरों का जीवन पूरी तरह रोज़गार की अनिश्चितता पर निर्भर करता है। उन्हें हर दिन काम मिलने की गारंटी नहीं होती, और अगर काम नहीं मिला तो उस दिन का चूल्हा जलना भी मुश्किल हो जाता है। यही आर्थिक असुरक्षा धीरे-धीरे मानसिक तनाव का रूप ले लेती है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बेरोजगारी (Unemploymen), पैसों की तंगी, कर्ज का बोझ और रोजमर्रा के जीवन का तनाव आत्महत्या के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। लगातार बढ़ती महंगाई और सीमित आय के चलते मजदूरों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है। कई बार वे कर्ज लेने को मजबूर होते हैं, जिसे चुका पाने में असमर्थता उन्हें मानसिक दबाव में डाल देती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य (Mental health) को लेकर जागरूकता की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रही है। ग्रामीण और गरीब तबकों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद सीमित है। लोग अपने तनाव और परेशानियों को साझा नहीं कर पाते, जिससे वे अंदर ही अंदर टूटते जाते हैं। इसके अलावा, सामाजिक दबाव और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी उनके मानसिक बोझ को बढ़ाती हैं।
पिछले 10 वर्षों में आत्महत्या के मामलों में यह आंकड़ा सबसे अधिक बताया गया है, जो यह संकेत देता है कि समस्या लगातार गहराती जा रही है। यह केवल आर्थिक संकट का मुद्दा नहीं है, बल्कि एक सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य संकट भी बन चुका है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद एक बार फिर मजदूरों के जीवन स्तर, उनकी सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। रोजगार के अवसर बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रभावी बनाने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ करने पर विशेष ध्यान देना होगा।
कुल मिलाकर, NCRB की यह रिपोर्ट एक चेतावनी है कि यदि समय रहते इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। मजदूर वर्ग की समस्याओं को समझकर उन्हें समाधान देना अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।

