भारतमाला मुआवजा घोटाले में बड़ा खुलासा: एक ही परिवार को बांटे ₹10 करोड़ से अधिक, ED जांच के रडार पर आए 14 भू-अर्जन प्रकरण…NV News
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NV News- Bharatmala Project Compensation Scam: छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित भू-अर्जन मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले और बड़े खुलासे हो रहे हैं। केंद्रीय जांच एजेंसी की हालिया कार्रवाई के बाद अब रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नायकबांधा गांव में हुए भूमि अधिग्रहण और करोड़ों रुपये के मुआवजा वितरण से जुड़े सरकारी दस्तावेजों की गहन स्क्रूटनी (पड़ताल) शुरू कर दी गई है। ईडी की इस कड़ाई से भू-अभिलेख और राजस्व विभाग के अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है।
जांच के दौरान हाथ लगे राजस्व दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे खेल में एक ही रसूखदार परिवार से जुड़े कई सदस्यों को नियम-कायदों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया गया है कि नायकबांधा गांव में सिर्फ एक ही परिवार के विभिन्न सदस्यों के खातों में कुल मिलाकर 10 करोड़ रुपये से अधिक की विशाल धनराशि मुआवजे के रूप में ट्रांसफर की गई।
48 डिसमिल जमीन और ₹11.62 करोड़ का खेल
दस्तावेजों के मुताबिक, महज 14 अलग-अलग भू-अर्जन प्रकरणों में लगभग 0.4800 हेक्टेयर (यानी करीब 48 डिसमिल) जैसी सीमित भूमि के एवज में रिकॉर्ड 11 करोड़ 62 लाख रुपये से अधिक का भारी-भरकम मुआवजा स्वीकृत कर दिया गया। इनमें से अधिकांश भू-अर्जन और भुगतान के आदेश अप्रैल 2020 के दौरान जारी किए गए थे। केंद्रीय जांच एजेंसियां अब इस बात की बारिकी से पड़ताल कर रही हैं कि मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया, गाइडलाइन की अनदेखी, भूमि के वास्तविक स्वरूप (कृषि या व्यावसायिक) और मूल्यांकन में किस स्तर पर इतनी बड़ी अनियमितता और वित्तीय हेराफेरी को अंजाम दिया गया।
छोटी-छोटी जमीनों पर बंटे करोड़ों रुपये
घोटाले की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) पर गौर करें तो सामने आए नामों में परिवार के महिला और पुरुष दोनों सदस्य शामिल हैं। उपलब्ध शासकीय रिकॉर्ड के अनुसार, कई संदिग्ध मामलों में 0.03 से 0.05 हेक्टेयर जैसी बेहद छोटी भूमि के टुकड़ों पर 70 लाख रुपये से लेकर 1.19 करोड़ रुपये तक का मुआवजा आंखें मूंदकर स्वीकृत किया गया। एक ही समयावधि, एक समान प्रक्रिया और मुआवजा निर्धारण के इस अजीब पैटर्न ने ही ईडी के अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके अलावा जांच में यह भी पता चला है कि कुछ चुनिंदा व्यक्तियों के नाम दूसरे चरण के भू-अर्जन रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं, जिससे यह आशंका गहरी हो गई है कि कहीं एक ही खसरा नंबर या भूमि पर दोबारा (Double Compensation) मुआवजा तो नहीं उठा लिया गया।
ED खंगाल रही है अफसरों की भूमिका और निवेश का पता
प्रमुख भुगतान विवरण बताते हैं कि सिंडिकेट के कुछ खास लाभार्थियों को 48 लाख रुपये से लेकर 2.63 करोड़ रुपये तक की एकमुश्त राशियां प्राप्त हुईं। ईडी अब न केवल मुआवजा वितरण और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की जांच कर रही है, बल्कि उस समय अभनपुर में पदस्थ रहे राजस्व अधिकारियों और दलालों की भूमिका को भी खंगाल रही है। सूत्रों के अनुसार, रायपुर जिले के अभनपुर अनुविभाग के अंतर्गत नायकबांधा, झांकी, उरला, मुड़पार, सातपारा, कोलर, टोकरो, बिरोदा, नवागांव और डोमा सहित करीब 10 गांवों के भू-अर्जन प्रकरण इस वक्त जांच के रडार पर हैं। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इस घोटाले से अर्जित की गई बेनामी काली कमाई को किन-किन रियल एस्टेट या अन्य सेक्टर्स में इन्वेस्ट किया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब गुनहगारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

