Livelihood Success News: दंतेवाड़ा की रामबती ने मुर्गी पालन से कमाए 25 हजार रुपये, बिहान योजना बनी आत्मनिर्भरता का सहारा….NV News

Share this

NV News दंतेवाड़ा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए अवसर तैयार कर रही है। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में करीब डेढ़ साल से चल रही इस पहल से लगभग 2,200 परिवारों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ा गया है। जिले में मुर्गी पालन के जरिए भी बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की रामबती नाग ने योजना का लाभ लेकर मुर्गी पालन शुरू किया। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें जून महीने में 100 चूजे और उनके लिए दाना उपलब्ध कराया गया था। शुरुआत में बीमारी के कारण करीब 25 से 30 चूजों की मौत हो गई, लेकिन रामबती ने हिम्मत नहीं छोड़ी और बचे हुए चूजों की बेहतर देखभाल जारी रखी। मेहनत का परिणाम यह रहा कि उन्होंने अब तक करीब 25 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर ली है।

रामबती तैयार मुर्गों को करीब 500 रुपये प्रति किलो की दर से बेचती हैं। इन मुर्गों का औसत वजन 1 से 3 किलोग्राम तक बताया गया है। मुर्गी पालन से हुई आमदनी ने उनके परिवार को आर्थिक सहारा देने के साथ ही उनमें अपने स्तर पर व्यवसाय आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी पैदा किया है।

ब्रुडिंग केंद्रों से महिलाओं को मिल रहा दोहरा लाभ

बिहान योजना के तहत क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार करने की पहल भी की गई है। महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील प्रजाति के जीरो-डे चूजे लाकर ब्रुडिंग केंद्रों में करीब 15 दिनों तक उनका पालन-पोषण करती हैं। इसके बाद स्वस्थ और तैयार चूजों को समूह की अन्य महिलाओं को दिया जाता है। इस व्यवस्था से चूजे तैयार करने वाली महिला और उनका पालन करने वाली महिला—दोनों के लिए आय का अवसर बन रहा है।

450 से ज्यादा महिलाएं मुर्गी पालन से जुड़ीं

दंतेवाड़ा जिले के अलग-अलग क्लस्टरों में अब तक करीब 450 ग्रामीण महिलाओं को मुर्गी पालन गतिविधि से जोड़ा जा चुका है। महिलाओं को उनकी क्षमता और जरूरत के अनुसार 50 से 100 तक चूजे उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर रोजगार और अतिरिक्त आमदनी के अवसर बढ़ रहे हैं।

रामबती की कहानी यह दिखाती है कि उचित मार्गदर्शन, संसाधन और लगातार मेहनत के साथ ग्रामीण महिलाएं छोटे स्तर की गतिविधियों को भी आय के स्थायी साधन में बदल सकती हैं। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन की वेबसाइट भी जिले में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी गतिविधियों और योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है।

Share this

You may have missed