Jagannath Rath Yatra: महाप्रभु जगन्नाथ के रथ में जुते सफेद घोड़ों के नाम जानते हैं आप? इनके पीछे छिपा है सृष्टि का सबसे बड़ा रहस्य…NV News

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पुरी (ओडिशा)। ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों और अद्भुत सनातन परंपराओं का प्रतीक है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को महाप्रभु जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और लाडली बहन सुभद्रा के साथ विशाल काष्ठ रथों पर सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करते हैं। महाप्रभु जगन्नाथ जिस भव्य रथ पर सवार होते हैं, उसे ‘नंदीघोष’ (Nandighosha) कहा जाता है।

इस दिव्य रथ की वास्तुकला जितनी अद्भुत है, उतने ही खास इसमें जुते सफेद रंग के 4 घोड़े हैं। ये केवल रथ खींचने वाले जीव नहीं हैं, बल्कि ये भगवान के चार दिव्य गुणों और सृष्टि के सबसे बड़े आध्यात्मिक रहस्यों को दर्शाते हैं।

महाप्रभु के ‘नंदीघोष’ रथ के चार सफेद घोड़ों के नाम और रहस्य

1. शंख (Shankha): यह नाम भगवान विष्णु के पांचजन्य शंख से प्रेरित है। यह घोड़ा जीवन में हर नई व शुभ शुरुआत, परम पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

2. बलाहक (Balahaka): यह घोड़ा असीम ऊर्जा और तीव्र गति को प्रदर्शित करता है। यह सृष्टि के ‘गतिशीलता के नियम’ को दर्शाता है, जो यह संदेश देता है कि समय और प्रकृति कभी ठहरती नहीं, निरंतर कर्म ही जीवन का आधार है।

3. श्वेत (Shweta): जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह पूरी तरह सफेदी, शांति और सौम्यता का प्रतिनिधित्व करता है। यह मानव मन को शांत रखने, सात्विक विचार अपनाने और आत्मा की शुद्धता का प्रतीक है।

4. हरिदाश्व (Haridashwa): इस घोड़े को सभी संकटों और बाधाओं का नाश करने वाला माना जाता है। यह जीव के जीवन में आने वाले दुखों, पापों और अज्ञानता रूपी अंधकार को मिटाकर मोक्ष की ओर ले जाने वाली दैवीय शक्ति का प्रतीक है।

तीनों रथों के घोड़ों का पूरा गणित

इस महा-उत्सव में तीनों भाई-बहनों के रथों का रंग, उनके सारथी, ध्वज और रथों में जुतने वाले घोड़ों की संख्या व रंग पूरी तरह भिन्न और निर्धारित होते हैं:

भगवान / देवीरथ का नामघोड़ों की संख्या व रंगघोड़ों के नाम

भगवान जगन्नाथनंदीघोष (Nandighosha)4 (सफेद)शंख, बलाहक, श्वेत, हरिदाश्व

भगवान बलभद्रतालध्वज (Taladhwaja)4 (काले)तीव्र, घोर, दीर्घशर्मा, स्वर्णनाभ

देवी सुभद्रादर्पदलन / पद्म रथ4 (लाल / कॉफी)रोचिका, मोचिका, जीता, अपराजिता

सृष्टि का सबसे बड़ा आध्यात्मिक संदेश: इन विशाल रथों को भले ही लाखों श्रद्धालु अपने हाथों से मोटे रस्सों द्वारा खींचते हैं, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से इसमें जुते घोड़े यह सिखाते हैं कि संसार रूपी इस जीवन रथ को सुचारू रूप से चलाने वाली असली ऊर्जा (ज्ञान, वैराग्य, भक्ति और कर्म) स्वयं ईश्वर की ही शक्तियां हैं। ईश्वर की इच्छा के बिना संसार की गति संभव नहीं है।

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