Higher Education News: डिजिटल लॉकर में भविष्य, ‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी छत्तीसगढ़ के छात्रों की पढ़ाई…NV News
Share this
NV News रायपुर: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा क्षेत्र को केंद्र सरकार की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी सौगात मिली है। राज्य में लागू की गई ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने यहाँ के उच्च शिक्षा परिदृश्य को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग के आपसी तालमेल व समन्वय से अनिवार्य रूप से लागू हुई यह योजना अब पूरी तरह परिपक्व हो चुकी है, जिसके चलते अब राज्य का हर छात्र अपनी जेब में डिजिटल यूनिवर्सिटी लेकर घूम रहा है।
यह ‘क्रेडिट बैंक’ छात्रों के लिए एक ऐसे अनूठे बैंक की तरह काम करता है, जहाँ पैसों की जगह उनकी पढ़ाई और कॉलेज के ‘क्रेडिट’ (अंक) सुरक्षित जमा होते हैं। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि किसी भी अनिवार्य वजह से किसी छात्र की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है, तो यह डिजिटल बैंक उसकी पुरानी मेहनत को बिल्कुल भी बेकार नहीं जाने देता है। नए नियमों के तहत अब छात्रों को “मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट” की एक बेहतरीन सुविधा मिल गई है, जो उनके भविष्य को सुरक्षित बनाती है।
उदाहरण के तौर पर यदि बस्तर के किसी दूरस्थ कॉलेज में पढ़ने वाले किसी छात्र को पारिवारिक या आर्थिक कारणों से सेकंड ईयर के बाद अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती है, तो पुरानी व्यवस्था में उसकी दो साल की पढ़ाई को ‘जीरो’ मान लिया जाता था। लेकिन अब नए सिस्टम में पहले दो वर्षों में छात्र ने जो भी अंक या क्रेडिट कमाए हैं, वे उसकी एबीसी आईडी (ABC ID) के जरिए डिजिटल बैंक में पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। इसके बाद जब भी वह दोबारा पढ़ना चाहेगा, तो वह रायपुर, बिलासपुर या देश के किसी भी अन्य विश्वविद्यालय में सीधे ‘थर्ड ईयर’ में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेगा।
तकनीक की यह इतनी बड़ी अवसंरचना (Infrastructure) छत्तीसगढ़ राज्य को पूरी तरह से निःशुल्क मिली है। केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय द्वारा इसके लिए शत-प्रतिशत तकनीकी व वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है, जिसके चलते राज्य सरकार पर इसका आर्थिक भार पूरी तरह से शून्य है। वर्तमान में यह डिजिटल सिस्टम छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, जिसके दायरे में राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं आ रहे हैं। इस महा-अभियान में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर), और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालय पूरी सक्रियता से भागीदार बने हैं।
इसके साथ ही डिजीलॉकर अब छात्रों के लिए एक मजबूत ‘सुरक्षा कवच’ बन गया है, जिससे मार्कशीट या डिग्रियां गुम होने या फटने का डर हमेशा के लिए खत्म हो गया है। सभी विश्वविद्यालयों को सीधे ‘नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी’ (NAD) पोर्टल से जोड़ दिया गया है, जिससे छात्र की डिग्री और सर्टिफिकेट सीधे उसके डिजीलॉकर में अपलोड हो रहे हैं। ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य हैं। इस योजना ने सुदूर वनांचल जैसे सुकमा, बीजापुर या सरगुजा के कॉलेजों को भी नेशनल पोर्टल से सीधे जोड़कर अमीर और गरीब छात्र के बीच का डिजिटल फासला पूरी तरह खत्म कर दिया है और छत्तीसगढ़ के युवाओं के सपनों को नए ‘डिजिटल पंख’ दे दिए हैं।

