Education News: स्कूल बना अखाड़ा: प्राचार्य और फिजिक्स लेक्चरर के बीच सरेआम चले लात-घूंसे, छात्र रह गए दंग…NV News

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NV News- छत्तीसगढ़ के औद्योगिक जिले कोरबा से शिक्षा व्यवस्था और गुरु-शिष्य की परंपरा को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद अजीब और स्तब्ध करने वाली घटना सामने आई है। जिस विद्यालय को ज्ञान का मंदिर कहा जाता है और जहां छात्र जीवन में अनुशासन, संस्कार और नैतिकता का पाठ सीखने आते हैं, उसी शाला परिसर में नए शिक्षा सत्र (न्यू सेशन) के पहले ही दिन मर्यादाएं पूरी तरह तार-तार हो गईं। जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाली में संस्था के जिम्मेदार प्राचार्य (प्रिंसिपल) मनोज सराफ और वहीं पदस्थ भौतिक शास्त्र (फिजिक्स) के व्याख्याता (लेक्चरर) के बीच किसी बात को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने स्कूल परिसर में ही एक-दूसरे पर हाथ छोड़ दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्कूल के स्टाफ से मिली जानकारी के अनुसार, नए सत्र के पहले दिन जब स्कूल में दाखिला लेने और क्लास अटेंड करने के लिए बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए थे, ठीक उसी समय प्राचार्य कक्ष के पास दोनों वरिष्ठों के बीच पहले तो किसी शासकीय कार्य या पुरानी रंजिश को लेकर तीखी बहस शुरू हुई। देखते ही देखते दोनों शिक्षकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और वे अपनी गरिमा भूल बैठे। विवाद इतना उग्र हो गया कि छात्रों और अन्य सहकर्मियों के सामने ही दोनों के बीच जमकर धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और लात-घूंसे चलने लगे। शिक्षा के मंदिर में हुए इस अभूपूर्व और शर्मनाक संग्राम को देखकर स्कूल में मौजूद मासूम विद्यार्थियों के बीच हड़कंप और डर का माहौल निर्मित हो गया।

इस हिंसक झड़प को देखकर स्कूल के अन्य शिक्षक और कर्मचारियों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन दोनों ही पक्ष शांत होने को तैयार नहीं थे। घटना के बाद स्कूल परिसर में काफी देर तक अफरा-अफरा मची रही और पढ़ाई का माहौल पूरी तरह प्रभावित हो गया। बच्चों के सामने शिक्षकों की इस गुंडागर्दी की खबर हवा की तरह पूरे पाली क्षेत्र और जिला मुख्यालय में फैल गई। स्थानीय पालकों और ग्रामीणों ने इस अमर्यादित कृत्य पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि जो शिक्षक खुद अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा पार कर रहे हैं, वे भला बच्चों को क्या संस्कार देंगे। घटना की लिखित सूचना तुरंत स्थानीय थाने और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को दी गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोरबा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और संयुक्त संचालक ने इस पूरे घटनाक्रम को संज्ञान में लिया है। शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि यह कृत्य बेहद गंभीर, अशोभनीय और शासकीय कर्मचारी आचरण नियमावली के सर्वथा विपरीत है, जिसने पूरे विभाग की छवि को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की अगुवाई में एक जांच कमेटी गठित कर दी गई है, जो 24 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी प्राचार्य मनोज सराफ और संबंधित व्याख्याता दोनों के खिलाफ निलंबन (सस्पेंशन) सहित कड़ी दंडात्मक व विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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