Desi Flavors – छत्तीसगढ़ का पारंपरिक जायका: ‘फरा’ से लेकर ‘अंगाकर’ तक; ये 8 व्यंजन हैं सेहत और स्वाद का बेजोड़ संगम…NV News
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NV News – रायपुर। छत्तीसगढ़ सिर्फ अपनी खनिज संपदा और जंगलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनूठे और पौष्टिक खान-पान के लिए भी जाना जाता है। यहाँ के व्यंजनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये कम तेल-मसालों में बनते हैं और अधिकतर भाप या धीमी आंच पर पकाए जाते हैं, जो इन्हें सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बनाता है। ‘धान के कटोरे’ के रूप में प्रसिद्ध इस राज्य में चावल और उससे बने व्यंजनों की एक समृद्ध परंपरा है।
आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के उन 8 पारंपरिक व्यंजनों के बारे में, जिनका स्वाद आपको यहाँ की मिट्टी से जोड़ देगा:
1. फरा (Muthiya)
चावल के आटे से बनने वाला ‘फरा’ छत्तीसगढ़ का सबसे लोकप्रिय नाश्ता है। इसे भाप (Steam) में पकाया जाता है और बाद में हल्के तेल, तिल, और मिर्च के साथ तड़का लगाया जाता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सुपाच्य भी होता है।
2. अंगाकर रोटी (Angakar Roti)
यह छत्तीसगढ़ का ‘देसी पिज्जा’ है। चावल के आटे को पलाश या केले के पत्तों के बीच रखकर कंडों (उपलों) की धीमी आंच पर सेंका जाता है। पत्तों की सौंधी महक और करारा स्वाद इसे लाजवाब बनाता है।
3. चीला (Chilla)
चावल के आटे और पानी के घोल से बना चीला लगभग हर छत्तीसगढ़ी घर में बनता है। इसे टमाटर की चटनी के साथ परोसा जाता है। यह वजन घटाने वालों के लिए एक बेहतरीन लो-कैलोरी विकल्प है।
4. मुठिया (Muthiya)
चावल के आटे और विभिन्न मसालों के मिश्रण को भाप में पकाकर मुठिया तैयार किया जाता है। यह छत्तीसगढ़ी संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे अक्सर चाय के साथ नाश्ते के रूप में पसंद किया जाता है।
5. बोरे-बासी (Bore Baasi)
गर्मी के दिनों में ‘बोरे-बासी’ छत्तीसगढ़ का अमृत माना जाता है। पके हुए चावल को रात भर पानी में भिगोकर रखा जाता है और सुबह दही, आम की चटनी या प्याज के साथ खाया जाता है। यह शरीर को ठंडा रखने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है।
6. चौसेला (Chousela)
चावल के आटे की बनी हुई ‘पूड़ी’ को चौसेला कहते हैं। यह त्यौहारों के समय विशेष रूप से बनाया जाता है। सुनहरा और कुरकुरा चौसेला अचार या सब्जी के साथ बहुत स्वादिष्ट लगता है।
7. डुबकी कढ़ी (Dubki Kadhi)
कढ़ी का यह छत्तीसगढ़ी रूप काफी अलग है। इसमें बेसन की छोटी-छोटी पकौड़ियों को तेल में तलने के बजाय सीधे उबलती हुई कढ़ी में डाल दिया जाता है (जिसे ‘डुबकी’ लगाना कहते हैं), जिससे यह कम ऑयली और सेहतमंद हो जाता है।
8. देहरौरी (Dehrori)
मीठे के शौकीनों के लिए देहरौरी सबसे खास है। इसे चावल और दही के मिश्रण से बनाकर चाशनी में डुबोया जाता है। इसे छत्तीसगढ़ का ‘गुलाब जामुन’ भी कहा जा सकता है।
[Image showing a traditional Chhattisgarh Thali with Fara, Chilla, and Angakar Roti served with spicy tomato chutney]
छत्तीसगढ़ के ये व्यंजन न केवल आपकी जीभ को स्वाद देंगे, बल्कि आपकी सेहत का भी ख्याल रखेंगे। अगली बार जब आप छत्तीसगढ़ आएं या घर पर कुछ नया ट्राई करना चाहें, तो इन ‘देसी’ व्यंजनों का लुत्फ जरूर उठाएं।
