बोरे-बासी पर सियासत: ‘हम तो रोज खाते हैं, दिखावे की जरूरत नहीं’, कांग्रेस के आयोजन पर सीएम साय का तीखा तंज…NV News

Share this

NV News- रायपुर। छत्तीसगढ़ में 1 मई यानी अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर “बोरे-बासी” को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रदेश की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘बोरे-बासी दिवस’ पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कड़ा प्रहार किया है। सीएम साय ने तंज कसते हुए कहा कि छत्तीसगढ़िया संस्कृति और खान-पान हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है, हम तो रोज बोरे-बासी खाते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके लिए अलग से कोई “दिवस” मनाने या राजनीतिक दिखावा करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार जमीन से जुड़ी है और परंपराओं को इवेंट मैनेजमेंट का हिस्सा नहीं मानती।

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस बार भी बोरे-बासी दिवस को पूरे उत्साह के साथ मनाया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज सहित तमाम कांग्रेसी नेताओं ने सोशल मीडिया पर बोरे-बासी खाते हुए अपनी तस्वीरें साझा कीं। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि यह केवल भोजन नहीं, बल्कि प्रदेश के किसानों और मजदूरों का स्वाभिमान है। दीपक बैज ने भाजपा पर ‘छत्तीसगढ़िया संस्कृति विरोधी’ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि साय सरकार मजदूरों के सम्मान की इस परंपरा को बंद करना चाहती है।

राजनीतिक खींचतान के बीच, भाजपा ने कांग्रेस शासनकाल के दौरान बोरे-बासी दिवस के आयोजनों में हुए खर्च पर भी सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पिछली सरकार ने महज कुछ घंटों के आयोजन में करोड़ों रुपये फूंक दिए थे, जिसकी जांच अब साय सरकार करवा रही है। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ की अस्मिता का प्रतीक माना जाने वाला “बोरे-बासी” अब सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मुख्य केंद्र बन गया है, जहाँ एक पक्ष इसे सहज जीवन शैली बता रहा है तो दूसरा इसे स्वाभिमान का महापर्व।

Share this

You may have missed