Climate Change Health Risk: जलवायु परिवर्तन से बेकाबू हुए पानी के घातक बैक्टीरिया; 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा…NV News

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NV News 20 जुलाई 2026। पर्यावरण में हो रहे अप्रत्याशित बदलाव अब सीधे इंसानी सेहत और विशेषकर मासूमों के जीवन पर भारी पड़ने लगे हैं। दैनिक जागरण की एक विशेष वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण पानी में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया और रोगाणु तेजी से म्यूटेट होकर ‘सुपरचार्ज’ यानी अधिक प्रतिरोधी और संक्रामक हो रहे हैं। यह बदलता पर्यावरण चक्र जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) को महामारी का रूप दे रहा है, जिसका सबसे सीधा और घातक असर 5 साल से कम उम्र के बच्चों पर पड़ रहा है।

मासूम बच्चों पर ही क्यों है सबसे ज्यादा खतरा?

चिकित्सा विशेषज्ञों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, छोटे बच्चों के इस महामारी की चपेट में आने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

कमजोर इम्यून सिस्टम (प्रतिरोधक क्षमता): 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता है। इसके कारण पानी में मौजूद थोड़े से भी बैक्टीरिया उनके शरीर में प्रवेश करते ही गंभीर इंफेक्शन पैदा कर देते हैं।

तेजी से बढ़ता डिहाइड्रेशन: इन घातक बैक्टीरिया की वजह से बच्चों में डायरिया, हैजा (कॉलरा) और टायफाइड जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। छोटे बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में बहुत जल्दी पानी छोड़ देता है (डिहाइड्रेशन), जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित होता है।

बाढ़ और सूखे का दोहरा संकट: जलवायु परिवर्तन के कारण कहीं अत्यधिक बाढ़ आ रही है तो कहीं गंभीर सूखा पड़ रहा है। बाढ़ के कारण पीने के साफ पानी के स्रोत सीवेज लाइनों से मिल जाते हैं, जिससे दूषित पानी सीधे बस्तियों तक पहुंच रहा है।

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने बढ़ाई चिंता

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ की विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए इस खतरे की गंभीरता को रेखांकित किया गया है:

आंकड़े और चेतावनी: दुनिया भर में 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक बहुत बड़ा कारण आज भी दूषित पानी और डायरिया है। जलवायु परिवर्तन के कारण पानी का तापमान जैसे-जैसे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे विब्रियो (Vibrio) और ई-कोलाई (E. coli) जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की प्रजनन दर और उनका जीवनकाल दोगुना हो गया है। ड्रेनेज सिस्टम का फेल होना इस संकट को और गंभीर बना रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते कार्बन उत्सर्जन को कम नहीं किया गया और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो आने वाले वर्षों में बाल स्वास्थ्य संकट बेकाबू हो सकता है। माता-पिता को सलाह दी गई है कि वे बच्चों को हमेशा पानी उबालकर ही पिलाएं और मानसून व बाढ़ के समय विशेष सतर्कता बरतें।

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