Chhattisgarh Housing Board: छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड बनेगा प्रदेश के अधोसंरचना विकास का नया इंजन, आवास के साथ सड़क, पुल और शहरी पुनर्विकास में भी निभाएगा अहम भूमिका…NV News
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NV News रायपुर: छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल आने वाले वर्षों में प्रदेश के आर्थिक और अधोसंरचनात्मक विकास का एक प्रमुख इंजन बनकर उभरेगा। अब हाउसिंग बोर्ड केवल मकानों के निर्माण तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़क, पुल, खेल परिसर, सार्वजनिक भवनों, टाउन प्लानिंग और शहरी पुनर्विकास जैसी बड़ी परियोजनाओं में भी इसकी सक्रिय भागीदारी होगी। यह बातें वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहीं।
700 करोड़ का ऋण समाप्त कर मंडल को दी गई नई मजबूती
मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार हाउसिंग बोर्ड को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और बहुआयामी संस्था बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। कुछ साल पहले हाउसिंग बोर्ड गंभीर वित्तीय संकट और भारी-भरकम ऋण देनदारी से जूझ रहा था। सरकार ने वित्त विभाग के सहयोग से लगभग 700 करोड़ रुपये की लंबित ऋण देनदारी समाप्त कर संस्था को बड़ी राहत दी है। इसके अलावा, ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS) योजना के जरिए लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों के विक्रय को भी गति दी गई है।
अब इन क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता बढ़ाएगा हाउसिंग बोर्ड
मांग के आधार पर प्रोजेक्ट: भविष्य में बिना मांग के आवासीय परियोजनाएं शुरू नहीं होंगी, बल्कि 30% से 60% शुरुआती बुकिंग की शर्त को अनिवार्य किया गया है ताकि पूंजी फंसी न रहे।
बड़ी अधोसंरचना परियोजनाएं: मंडल के अनुभवी इंजीनियरों की क्षमता का उपयोग सड़क, पुल-पुलिया, स्टेडियम और बड़े सार्वजनिक भवनों के निर्माण में किया जाएगा। साथ ही आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के बाहर भी अन्य राज्यों की निविदाओं में हिस्सा लेने का लक्ष्य है।
TPS और PPP मॉडल: सरकारी बजट पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना विकास कार्यों को गति देने के लिए टाउन प्लानिंग स्कीम (TPS) और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। उदाहरण के लिए, सेरीखेड़ी परियोजना में पीपीपी मॉडल अपनाने से लगभग 94 एकड़ भूमि की बचत हुई है।
कार्यशाला में आधुनिक तकनीक और नवाचार पर जोर
मंडलाध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड का विस्तार केवल नाम बदलना नहीं है, बल्कि यह सोच और कार्यशैली में बड़े बदलाव का संकेत है। पिछले 18 महीनों में मंडल ने लगभग 8 हजार संपत्तियों के विक्रय से 1,800 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। इस विशेष तकनीकी कार्यशाला में आईआईएम रायपुर, आईआईआईटी और एनआईटी के विशेषज्ञों ने अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आधुनिक वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन और तकनीकी दक्षता के गुर सिखाए।

