Chhattisgarh High Court Divorce Case: बार-बार आपराधिक मुकदमे चलाने को कोर्ट ने माना मानसिक क्रूरता, विवाह विच्छेद का आदेश…NV News
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NV News बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पति के खिलाफ बार-बार दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा जैसे आपराधिक मामले दर्ज कराने तथा लगातार कानूनी कार्रवाई जारी रखने को मानसिक क्रूरता की श्रेणी में माना है। कोर्ट ने मामले में पति की याचिका स्वीकार करते हुए विवाह विच्छेद का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने जांजगीर निवासी 29 वर्षीय विशंभर प्रसाद राठौर की याचिका पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने उनकी 30 वर्षीय पत्नी मनीषा राठौर से विवाह समाप्त करने का आदेश दिया। मामले में पति की ओर से आरोप लगाया गया था कि पत्नी ने उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से संबंधित मामले दर्ज कराए थे।
मामले के अनुसार, विशंभर प्रसाद राठौर और मनीषा राठौर का विवाह वर्ष 2015 में हुआ था। पति का कहना था कि शादी के बाद पत्नी कुछ ही दिनों तक ससुराल में रही और इसके बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। उन्होंने पत्नी पर दुर्व्यवहार करने और घर में लगातार अशांति का माहौल पैदा करने के आरोप लगाए।
पति की ओर से यह भी बताया गया कि आपराधिक मामलों में आरोपितों के बरी होने के बाद भी संबंधित फैसलों को चुनौती दी गई और कानूनी कार्यवाही लगातार जारी रही। हाई कोर्ट ने इन परिस्थितियों को वैवाहिक जीवन पर पड़ने वाले मानसिक दबाव और क्रूरता के रूप में देखा। इसी आधार पर डिवीजन बेंच ने पति की याचिका मंजूर करते हुए विवाह विच्छेद का आदेश दिया।

