मौसेरी बहन से शादी हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अवैध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला…NV News
Share this
NV News- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक और वैवाहिक कानूनों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि मौसेरी बहन (Maternal Cousin) से विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पूरी तरह अवैध है। न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हिंदू धर्म में ‘सपिंड’ रिश्तों के बीच विवाह वर्जित है और मौसी की बेटी इसी श्रेणी में आती है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक किसी विशिष्ट समुदाय में ऐसी शादी की प्राचीन और स्थापित परंपरा न हो, तब तक इसे वैध नहीं माना जा सकता।
जस्टिस पी. सैम कोशी और जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की खंडपीठ ने अपने फैसले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “कोई भी सामाजिक प्रथा या रीति-रिवाज देश के कानून से ऊपर नहीं हो सकता।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 5(v) के अनुसार, यदि पक्षकार सपिंड नातेदारी के भीतर हैं, तो उनका विवाह शून्य (Void) माना जाएगा। इस मामले में याचिकाकर्ता ने अपनी शादी को वैध ठहराने के लिए स्थानीय रीति-रिवाजों का हवाला दिया था, जिसे कोर्ट ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया।
इस फैसले का दूरगामी प्रभाव उन मामलों पर पड़ेगा जहां लोग परंपराओं की आड़ में प्रतिबंधित रिश्तों में विवाह कर लेते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कानून की नजर में रक्त संबंधों और सपिंड विवाहों पर रोक केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आनुवंशिक और कानूनी आधार पर आधारित है। इस निर्णय से यह साफ हो गया है कि यदि कोई विवाह कानून द्वारा निर्धारित ‘प्रतिबंधित डिग्री’ के भीतर आता है, तो वह कानूनी रूप से अमान्य होगा और उसे सामाजिक मान्यता के आधार पर संरक्षण नहीं मिलेगा।
