Digital Governance CG: छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया सारथी बनी ‘1076 सीएम हेल्पलाइन’; जनता और सरकार के बीच संवाद का मजबूत सेतु, तकनीकी उन्नति से सशक्त हुए नागरिक…NV News
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NV News- CG CM Helpline 1076 (छत्तीसगढ़ सीएम हेल्पलाइन 1076): छत्तीसगढ़ राज्य की अनवरत जारी विकास यात्रा और प्रशासनिक सुधारों के इतिहास में ‘सीएम हेल्पलाइन 1076’ के रूप में सुशासन का एक बेहद चमकदार और क्रांतिकारी नया अध्याय जुड़ चुका है। यह नया अध्याय केवल एक तकनीकी उन्नति भर नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों में रहने वाले अंतिम पायदान के आम नागरिक के सशक्तिकरण, उसके अटूट विश्वास और पूरी सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता (Transparency) लाने का एक जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रारंभ की गई यह अनूठी डिजिटल सेवा आज सीधे तौर पर प्रदेश की ढाई करोड़ जनता और शासन-प्रशासन के बीच सीधे संवाद का सबसे मजबूत और विश्वसनीय सेतु साबित हो रही है। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब सत्ता के गलियारों में बैठे नीति-नियंताओं तक समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति की आवाज भी बिना किसी बाधा के पहुंचे और उसकी बुनियादी समस्याओं का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर न्यायपूर्ण समाधान हो सके। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने इसी संकल्प को धरातल पर उतारते हुए इस दिशा में जो प्रभावी कदम उठाया है, वह राज्य को सुशासन (Sushasan) की अभूतपूर्व ऊंचाइयों की ओर ले जा रहा है।
विगत वर्षों की बात करें तो छत्तीसगढ़ जैसे जनजातीय और भौगोलिक रूप से जटिल राज्य में आम नागरिकों को अपनी छोटी-बड़ी शिकायतों, जैसे राशन कार्ड, पेंशन, बिजली बिल की गड़बड़ी, पानी की समस्या या राजस्व मामलों के निपटारे के लिए जिला मुख्यालयों या राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालयों और सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते थे। इसमें न केवल ग्रामीणों का समय और पैसा बर्बाद होता था, बल्कि कई बार वे बिचौलियों और भ्रष्ट तंत्र के चंगुल में भी फंस जाते थे। लेकिन अब ‘सीएम हेल्पलाइन 1076’ (CM Helpline 1076) के शुरू होने से पूरी व्यवस्था घर बैठे एक फोन कॉल पर सिमट गई है। प्रदेश का कोई भी नागरिक किसी भी समय इस चार अंकों वाले टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके सीधे मुख्यमंत्री सचिवालय के विशेष विंग में अपनी शिकायत या समस्या को पूरी प्रमाणिकता के साथ दर्ज करा सकता है।
इस पूरी प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका रिस्पॉन्स टाइम और त्रि-स्तरीय कड़ा कमान कंट्रोल सिस्टम है। जैसे ही कोई नागरिक 1076 पर अपनी समस्या दर्ज कराता है, उसे एक विशिष्ट ट्रैकिंग नंबर (कंप्लेंट आईडी) जारी हो जाता है। इसके बाद वह शिकायत स्वचालित रूप से संबंधित विभाग के मैदानी अधिकारी से लेकर जिला कलेक्टर तक के डिजिटल डैशबोर्ड पर ट्रांसफर हो जाती है। इस पूरी व्यवस्था में हर स्तर पर जवाबदेही तय की गई है; अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे निर्धारित समय के भीतर शिकायतकर्ता से संपर्क करें और उसकी समस्या का निराकरण कर पोर्टल पर क्लोजर रिपोर्ट अपलोड करें। यदि तय समय में समाधान नहीं होता, तो मामला स्वतः ही उच्च अधिकारियों और अंततः मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की निगरानी सूची में अपग्रेड हो जाता है। इस कड़े प्रशासनिक ढांचे के कारण मैदानी स्तर के अमले में काम को लेकर भारी कसावट और तत्परता देखी जा रही है।
लल्लूराम डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएम हेल्पलाइन 1076 ने न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार और लेती-देती पर कड़ा प्रहार किया है, बल्कि इससे शासन की कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत का वास्तविक डेटा भी सरकार को मिल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद इस बात पर जोर देते रहे हैं कि तकनीक का उपयोग जनता की भलाई और प्रशासनिक सुगमता के लिए होना चाहिए। यही वजह है कि आज छत्तीसगढ़ का यह मॉडल पूरे देश में डिजिटल गवर्नेंस (Digital Governance) के एक बेहतरीन उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, 1076 सीएम हेल्पलाइन ने छत्तीसगढ़ के आम आदमी को यह अहसास कराया है कि सरकार उनके साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं का समाधान अब सिर्फ एक कॉल की दूरी पर है।

