CG HC Verdict: बालिगों के सहमति से बने संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता…NV News

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CG HC Verdict: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप में सजा पाए सीएएफ जवान रुपेश कुमार पुरी को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने कहा कि यह मामला झूठे विवाह वादे का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और सहमति का था। कोर्ट ने माना कि पीड़िता बालिग थी और अपनी इच्छा से आरोपी के साथ रह रही थी, ऐसे में इसे दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।

दरअसल, यह मामला बस्तर जिले का है, जहां वर्ष 2020 में पीड़िता ने रुपेश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया कि शादी का झांसा देकर आरोपी ने 27 जून 2020 को उससे संबंध बनाए, जबकि उसकी शादी अगले दिन किसी अन्य युवक से तय थी। शिकायत में कहा गया कि रुपेश ने दो महीने तक उसे अपने घर में रखा और फिर धमकाकर निकाल दिया। इसी आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट, जगदलपुर ने वर्ष 2022 में आरोपी को 10 साल की सजा और 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया था।

हालांकि, हाई कोर्ट ने फैसले की समीक्षा के दौरान पाया कि दोनों के बीच 2013 से प्रेम संबंध था। पीड़िता ने खुद स्वीकार किया कि उसने फेसबुक पर रुपेश को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी और वर्षों तक दोनों का रिश्ता चलता रहा। उसने यह भी कहा कि यदि आरोपी के माता-पिता उसे प्रताड़ित न करते, तो वह पुलिस में शिकायत नहीं करती। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मेडिकल और एफएसएल रिपोर्ट में जबरन संबंध के कोई प्रमाण नहीं मिले।

रुपेश के वकील ने तर्क दिया कि यह प्रेम संबंध का मामला है, दुष्कर्म का नहीं। दोनों एक ही गांव के हैं और पीड़िता अपनी मर्जी से आरोपी के घर गई थी। आरोपी सीएएफ में ड्यूटी पर रहता था, जिससे दोनों के परिवारों में विवाद हुआ और उसी के बाद एफआइआर दर्ज की गई।

राज्य पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर दो महीने तक यौन शोषण किया, लेकिन कोर्ट ने माना कि यह साबित नहीं हुआ कि शुरुआत से ही शादी करने का इरादा नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि केवल शादी के वादे पर बने संबंध को दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता, जब तक यह प्रमाणित न हो कि आरोपी ने शुरू से ही धोखा देने की नीयत रखी थी। इसी आधार पर कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द कर रुपेश कुमार पुरी को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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