CG Cultural Architecture: नई विधानसभा – परंपरा, तकनीक और भविष्य का संगम…NV News
Share this
रायपुर/(CG Cultural Architecture): छत्तीसगढ़ की नई विधानसभा का उद्घाटन हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, और यह क्षण राज्य के 25 वर्ष के विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बन गया। राज्य गठन के समय रायपुर के एक निजी स्कूल के सभागार से शुरू हुआ विधानसभा का सफर आज 51 एकड़ में बने भव्य, आधुनिक और सांस्कृतिक विरासत से सजे भवन तक पहुंच चुका है। यह नया परिसर न केवल प्रशासनिक दृष्टि से सशक्त है, बल्कि अपनी वास्तुकला और निर्माण तकनीक के कारण राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है।
परंपरा और आधुनिकता का अनूठा समन्वय:
नया विधानसभा भवन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को प्रमुखता से सामने लाता है। इसे 324 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है और इसकी डिज़ाइन में पारंपरिक कला और आधुनिक इंजीनियरिंग का गहरा सम्मिश्रण दिखाई देता है। भवन के वास्तुकार संदीप श्रीवास्तव ने विशेष रूप से “धान का कटोरा” कहलाने वाले राज्य की पहचान को केंद्र में रखा है। इसी सोच के तहत भवन की छत पर धान की बालियों और पत्तियों की बेहद खूबसूरत नक्काशी की गई है, जो इसे एक विशिष्ट रूप प्रदान करती है।
इमारत के दरवाजे, दीवारों के पैनल और अधिकतर फर्नीचर बस्तर के काष्ठ शिल्पियों द्वारा तैयार किए गए हैं। इससे न केवल स्थानीय कला को संबल मिला है, बल्कि यह भवन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक गहराई का प्रतीक भी बन गया है।
प्राकृतिक रोशनी से सम्पन्न, पर्यावरण के अनुकूल भवन:
नई विधानसभा का निर्माण पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता को ध्यान में रखकर किया गया है। भवन की संरचना ऐसी है कि, दिन के समय बिजली जाने पर भी अंदर अंधेरा नहीं होता। प्राकृतिक रोशनी हर कोने तक पहुंचती है, जिससे ऊर्जा की बचत के साथ ही पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है।
इसके अलावा, भवन को पूरी तरह ऊर्जा-कुशल बनाने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए हैं। वर्षा जल संचयन के लिए दो बड़े जलाशय भी बनाए गए हैं, जो इसे ‘ग्रीन बिल्डिंग’ की श्रेणी में मजबूती से स्थापित करते हैं।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार:
छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, विधानसभा भवन को वर्तमान ही नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। सदन को आवश्यकता पड़ने पर 200 सदस्यों की क्षमता तक बढ़ाया जा सकता है और ऐसा करने के लिए भवन की संरचना में किसी भी तरह की तोड़फोड़ की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
भविष्य में पेपरलेस विधानसभा संचालित करने की दिशा में भी यहां आवश्यक तकनीकी सुविधाओं को पहले से शामिल किया गया है, जिससे यह देश की सबसे आधुनिक विधानसभाओं में से एक के रूप में उभरती है।
बेहतर पहुँच, पारदर्शिता और आधुनिक सुविधाएँ:
सदन के गलियारों को इस तरह तैयार किया गया है कि, किसी भी कोने से सदन की गतिविधियों को देखा जा सके। यह डिज़ाइन पारदर्शिता और सुचारु कार्यवाही का प्रतीक है।
भवन के तीन मुख्य विंग-
• विंग-ए: विधानसभा सचिवालय।
• विंग-बी: मुख्य सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का कार्यालय।
• विंग-सी: सभी मंत्रियों के कार्यालय।
इन तीनों विंग्स को आधुनिक प्रौद्योगिकी और सुविधाओं से परिपूर्ण रखा गया है।
आधुनिक ऑडिटोरियम और सेंट्रल हॉल:
नए परिसर में 500 लोगों की क्षमता वाला एक अत्याधुनिक ऑडिटोरियम बनाया गया है। इसके साथ ही 100 व्यक्तियों की क्षमता वाला सेंट्रल हॉल सरकारी कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण बैठकों के लिए उपयुक्त है। भवन की संपूर्ण वास्तुकला में आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संतुलन दिखाई देता है।
पहले सत्र से आज तक का ऐतिहासिक सफर:
छत्तीसगढ़ राज्य का गठन 1 नवंबर 2000 को हुआ था। उस समय विधानसभा का पहला सत्र रायपुर के राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में हुआ था, जो एक निजी स्कूल का सभागार है। कुछ समय बाद विधानसभा को रायपुर-बलौदाबाजार मार्ग स्थित नए सरकारी भवन में स्थानांतरित किया गया। 25 साल बाद आज विधानसभा अपने तीसरे और सबसे आधुनिक परिसर में प्रवेश कर चुकी है।
नई इमारत – 3 करोड़ लोगों की उम्मीदों का घर:
यह नया भवन सिर्फ लोकतांत्रिक गतिविधियों का केंद्र नहीं है, बल्कि यह राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं, उम्मीदों और विकास की दिशा को भी प्रतिबिंबित करता है। पारंपरिक शिल्प, सांस्कृतिक जड़ों और उन्नत तकनीक के संगम से बनी यह इमारत छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।
