खूनी सड़कें: छत्तीसगढ़ में रफ्तार का कहर, 4250 लोगों की मौत; रायपुर में सबसे ज्यादा हादसे…NV News

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छत्तीसगढ़ में सड़कों पर दौड़ती तेज रफ्तार अब जिंदगियों पर भारी पड़ने लगी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछले एक वर्ष के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में कुल 4250 लोगों की मौत हो गई है। यह आंकड़ा न केवल डराने वाला है, बल्कि राज्य की यातायात व्यवस्था और सुरक्षा नियमों के पालन पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े करता है। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद हादसों का ग्राफ नीचे गिरने का नाम नहीं ले रहा है।

सड़क दुर्घटनाओं के मामले में प्रदेश की राजधानी रायपुर सबसे संवेदनशील बनकर उभरी है। आंकड़ों की मानें तो रायपुर जिले में सबसे ज्यादा सड़क हादसे और मौतें दर्ज की गई हैं। शहरी इलाकों में ओवरस्पीडिंग और ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी इन मौतों का मुख्य कारण मानी जा रही है। रायपुर के बाद दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े शहर भी इस सूची में काफी ऊपर हैं, जहां आए दिन ‘ब्लैक स्पॉट्स’ पर हादसे हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन दुर्घटनाओं के पीछे तेज रफ्तार, नशाखोरी और हेलमेट-सीटबेल्ट का उपयोग न करना सबसे बड़े कारक हैं। इसके अलावा, सड़कों की खराब बनावट और आवारा मवेशी भी हादसों को न्योता दे रहे हैं। पुलिस विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने और चालान काटने के बाद भी चालकों के व्यवहार में अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा है, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।

सरकार अब इन ‘खूनी सड़कों’ पर लगाम कसने के लिए नए सुरक्षा ऑडिट की तैयारी कर रही है। खतरनाक मोड़ों को सुधारने और डार्क जोन में लाइटिंग की व्यवस्था करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, जब तक आम नागरिक सड़क सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे और गति सीमा का पालन नहीं करेंगे, तब तक इन आंकड़ों को कम करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

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