अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा की कार्यशाला: गोंडी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की उठी मांग…NV News

Share this

NV News रायपुर, 19 जुलाई 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर में अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा की एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम और मंडला (मध्य प्रदेश) के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते विशेष रूप से शामिल हुए। कार्यशाला के दौरान आदिवासी समाज की संस्कृति, समृद्ध इतिहास और उनके सर्वांगीण विकास को लेकर गहन मंथन किया गया। इसके साथ ही, समाज के नेताओं ने आदिवासी हितों और पहचान से जुड़े कई बड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि इस आयोजन में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम जनमन योजना’ और ‘धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना’ पर व्यापक चर्चा हुई है। उन्होंने गोंडी भाषा के ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भाषा देश के एक बहुत बड़े भूभाग में बोली जाती है। छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित पड़ोसी राज्यों जैसे महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई हिस्सों में गोंडी बोलने वाले लोग बड़ी संख्या में निवास करते हैं। इसी व्यापकता को देखते हुए गोंड समाज की ओर से गोंडी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पुरजोर मांग की जा रही है।

इस अवसर पर मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी समाज के एक और बेहद संवेदनशील और लंबे समय से लंबित मुद्दे ‘आदिवासी धर्म कोड’ पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी एक विशिष्ट पहचान, परंपरा और धार्मिक मान्यताएं हैं, जिनका संरक्षण बेहद जरूरी है। कार्यशाला में उपस्थित पदाधिकारियों ने सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और समाज में शिक्षा व रोजगार के अवसरों को बढ़ाने पर भी अपनी सहमति जताई। कार्यक्रम में भारी संख्या में समाज के बुद्धिजीवी और पदाधिकारी उपस्थित थे।

Share this

You may have missed