Sarangarh Women Farming News: अतिक्रमण से मुक्त 25 एकड़ भूमि बनी समृद्धि का आधार, 14 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर…NV News
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NV News रायपुर, 20 सितंबर 2026। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सरिया तहसील के ग्राम सुखापाली में कभी अतिक्रमण की चपेट में रही करीब 25 एकड़ शासकीय भूमि अब महिला आजीविका और आधुनिक खेती का केंद्र बन रही है। राजस्व विभाग, ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के बाद इसे ग्रामीण महिलाओं की आजीविका से जोड़ा गया। अब हरियाली स्व-सहायता समूह की 14 महिलाएं खेती और बागवानी के जरिए आर्थिक रूप से आगे बढ़ रही हैं।
अतिक्रमण से आजीविका तक बदली तस्वीर
सुखापाली की करीब 25 एकड़ शासकीय भूमि लंबे समय से अतिक्रमण की स्थिति में थी। संयुक्त प्रयासों से भूमि को मुक्त कराने के बाद प्रशासन ने इसे ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन से जोड़ने की योजना तैयार की।
इसके तहत पहले बंजर और असिंचित भूमि को कृषि योग्य बनाने पर काम किया गया। अलग-अलग सरकारी योजनाओं के अभिसरण से भूमि पर खेती के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की गईं।
फेंसिंग और ड्रिप सिंचाई से तैयार हुआ मॉडल फार्म
वीबीग्रामजी (VB-GramG) योजना के तहत भूमि को कृषि योग्य बनाने के साथ आवश्यक शेड का निर्माण कराया गया। वहीं जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद से 25 एकड़ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चैन-लिंकिंग फेंसिंग और आधुनिक ड्रिप सिंचाई व्यवस्था स्थापित की गई।
समूह को क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के माध्यम से 10 लाख रुपये की ऋण सहायता भी मिली। इन संसाधनों की मदद से महिलाओं ने खेती को व्यवस्थित और व्यावसायिक रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाया।
7,300 अमरूद के पौधों के साथ अंतर-फसली खेती
आर्थिक सहयोग मिलने के बाद हरियाली स्व-सहायता समूह ने करीब 7,300 अमरूद के पौधे लगाए। इनमें वीएनआर (VNR) और पिंक ताइवान किस्म के पौधे शामिल हैं।
अमरूद के पौधों से उत्पादन शुरू होने में समय लगने को देखते हुए महिलाओं ने अंतर-फसली खेती का मॉडल अपनाया। पौधों के बीच खाली जमीन में खीरा, लौकी और मखना जैसी फसलों की खेती शुरू की गई। इन फसलों को स्थानीय मंडियों और बाजारों में बेचकर समूह को नियमित आय मिलने लगी।
14 महिलाएं बन रहीं कृषि उद्यमी
25 एकड़ भूमि पर खेती, बागवानी और आधुनिक सिंचाई व्यवस्था के विकास ने समूह की महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा किए हैं। अब वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक कृषि गतिविधियों में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं।
सुखापाली का यह प्रयोग अतिक्रमण से मुक्त शासकीय भूमि के उपयोग, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन को एक साथ जोड़ता है। हरियाली स्व-सहायता समूह की 14 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

