Education News: छत्तीसगढ़ के 499 सरकारी स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनर नहीं, करोड़ों के उपकरणों के उपयोग पर उठे सवाल…NV News

Share this

NV News रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई व्यावसायिक शिक्षा योजना फिलहाल गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। करीब ढाई साल पहले प्रदेश के 652 सरकारी स्कूलों में अलग-अलग व्यावसायिक ट्रेड शुरू किए गए थे। योजना के तहत प्रत्येक स्कूल में दो व्यावसायिक प्रशिक्षकों यानी वोकेशनल ट्रेनर की नियुक्ति की जानी थी, लेकिन भर्ती प्रक्रिया विवादों में फंसने के बाद योजना की रफ्तार प्रभावित हुई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 499 स्कूलों में वर्तमान में वोकेशनल ट्रेनर नहीं होने से वहां व्यावसायिक शिक्षा की नियमित गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

जानकारी के मुताबिक पिछले वर्ष हुई भर्ती प्रक्रिया के दौरान भ्रष्टाचार और लेन-देन के आरोप सामने आए थे। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया। इसका सीधा असर उन सरकारी स्कूलों पर पड़ा, जहां विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक शिक्षा के नए ट्रेड शुरू किए गए थे। प्रशिक्षकों की कमी के कारण योजना के उद्देश्य के मुताबिक विद्यार्थियों को नियमित प्रायोगिक और कौशल आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में परेशानी सामने आ रही है।

40 करोड़ रुपये के उपकरणों के उपयोग पर सवाल

व्यावसायिक शिक्षा के लिए स्कूलों में बड़ी संख्या में उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार करीब 40 करोड़ रुपये के उपकरण ऐसे स्कूलों में पड़े हैं, जहां प्रशिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण उनका पर्याप्त इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इससे सरकारी संसाधनों के उपयोग और विद्यार्थियों को मिलने वाले व्यावहारिक प्रशिक्षण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

भर्ती विवाद का असर विद्यार्थियों पर

व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े कौशल उपलब्ध कराना है। इसके लिए स्कूल स्तर पर विभिन्न ट्रेड संचालित किए जा रहे थे। लेकिन प्रशिक्षकों की कमी और भर्ती प्रक्रिया में आई रुकावट के कारण योजना का अपेक्षित लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचने में बाधा आ रही है।

अब जरूरत इस बात की है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच के साथ प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि स्कूलों में रखे उपकरणों का उपयोग हो सके और विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। साथ ही सरकारी राशि से खरीदे गए संसाधनों के लंबे समय तक अनुपयोगी रहने की स्थिति से बचने के लिए विभागीय स्तर पर जल्द ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

Share this

You may have missed