नकटी बुलडोजर कार्रवाई पर बवाल: बेघर परिवारों का फूटा गुस्सा; कलेक्टोरेट में धरने के बाद मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव करने निकले प्रदर्शनकारी…NV News

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NV News रायपुर, 4 जुलाई 2026। राजधानी रायपुर के करीब स्थित नकटी गांव में तीन दिन पहले बड़े पैमाने पर की गई बुलडोजर कार्रवाई का मामला अब पूरी तरह गरमा गया है। बेघर और प्रभावित हुए परिवारों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा, जिसके बाद विस्थापितों ने कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में एक बड़ा और उग्र आंदोलन छेड़ दिया है।

अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी पहले रायपुर कलेक्टोरेट पहुंचे। कलेक्टोरेट परिसर के सामने बैठकर प्रभावित परिवारों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिना किसी पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था के उनके आशियानों को उजाड़ दिया गया।

अधिकारियों के न मिलने पर बदला रुख, मंत्री बंगले की ओर कूच

कलेक्टोरेट के सामने लंबे समय तक चले धरने के बावजूद जब प्रदर्शनकारियों से बात करने या उनका ज्ञापन लेने के लिए शासन-प्रशासन का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो आंदोलनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया।

अधिकारियों के इस रुख से नाराज होकर विस्थापित परिवार और कांग्रेस नेता कलेक्टोरेट से उठकर पैदल मार्च करते हुए सीधे आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का घेराव करने के लिए निकल पड़े। सैकड़ों लोगों के इस अचानक पैदल मार्च से सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हड़कंप मच गया और आनन-फानन में पुलिस बल को तैनात किया गया।

मामले के मुख्य बिंदु:

80 मकानों पर चला था बुलडोजर: नकटी गांव में करीब तीन दिन पहले भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने के नाम पर लगभग 80 मकानों को ढहा दिया गया था।

विस्थापितों की मांग: प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से वहां रह रहे थे। इस मूसलाधार बारिश के मौसम में अचानक बेघर कर दिए जाने से उनके सामने रहने और खाने-पीने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

राजनीतिक मोड़: इस पूरे मामले में अब कांग्रेस खुलकर विस्थापितों के समर्थन में आ गई है और सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर रही है।

मुआवजे और पुनर्वास की मांग: प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि जिन लोगों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से रहने के लिए सरकारी आवास आवंटित किए जाएं या उचित मुआवजा दिया जाए। जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह आंदोलन और तेज होगा।

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