‘मलाईदार पोस्टिंग’ पर चला कलेक्टर का डंडा: 74 शिक्षकों और कर्मचारियों का संलग्नीकरण खत्म, मूल शालाओं में लौटने का आदेश…NV News
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NV News बीजापुर/रायपुर, 4 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत बीजापुर जिले में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और प्रशासनिक कसावट कसने के लिए एक बड़ी कार्रवाई की गई है। शिक्षा विभाग में वर्षों से मलाईदार कुर्सियों और दफ्तरों में बाबूगीरी कर रहे शिक्षकों व विभागीय कर्मचारियों के अटैचमेंट पर प्रशासन का डंडा चला है।
बीजापुर कलेक्टर द्वारा जारी एक कड़े आदेश के तहत जिले के विभिन्न कार्यालयों में संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पर काम कर रहे 74 अधिकारियों, शिक्षकों, लिपिकों (क्लर्क) और भृत्यों (चपरासी) का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है। आदेश में साफ तौर पर निर्देश दिए गए हैं कि सभी अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी देरी के अपनी मूल पदस्थापना वाली संस्था या स्कूल में अपनी आमद (जॉइनिंग) दें।
दफ्तरों में मची हलचल, सालों पुरानी व्यवस्था ध्वस्त
कलेक्टर कार्यालय से शुक्रवार को यह आदेश जारी होते ही जिला शिक्षा कार्यालय (DEO Office) सहित विकासखंड शिक्षा कार्यालयों और अन्य संबंद्ध विभागों में दिनभर हड़कंप और हलचल का माहौल रहा।
बताया जा रहा है कि इनमें से कई शिक्षक और कर्मचारी ऐसे थे जो अपने रसूख या जुगाड़ के दम पर ग्रामीण और अंदरूनी क्षेत्रों के स्कूलों को छोड़कर जिला मुख्यालय के दफ्तरों में ‘मलाईदार’ काम संभाल रहे थे। इसके कारण सुदूर अंचलों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो रही थी और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
कार्रवाई के मुख्य बिंदु:
74 पर गाज: इस प्रशासनिक शुद्धि अभियान में कुल 74 लोगों को दफ्तरों से हटाकर मैदानी ड्यूटी पर भेजा गया है।
चारों वर्ग प्रभावित: इस आदेश की जद में न केवल शिक्षक आए हैं, बल्कि दफ्तरों में जमे अधिकारी, लिपिकीय वर्ग और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी शामिल हैं।
तत्काल प्रभाव: सभी को तत्काल कार्यमुक्त होकर अपने मूल कर्तव्यों पर लौटने को कहा गया है, ऐसा न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी है।
बस्तर के वनांचल स्कूलों को मिलेगा फायदा
प्रशासन के इस कड़े रुख की आम जनता और अभिभावकों द्वारा सराहना की जा रही है। बीजापुर जैसे संवेदनशील और आदिवासी बहुल वनांचल क्षेत्र में कई ऐसे स्कूल हैं जो एकल शिक्षकीय हैं या जहां विषय विशेषज्ञों की कमी है। कार्यालयों से मुक्त होकर जब ये शिक्षक वापस अपनी मूल शालाओं में पहुंचेंगे, तो निश्चित रूप से ग्रामीण बच्चों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

