छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव: पारा 42 पार होते ही टूट गए सारे रिकॉर्ड, इस वजह से चरमराई व्यवस्था!…NV News
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NV News- छत्तीसगढ़ में इस बार मई की भीषण गर्मी ने न सिर्फ आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है, बल्कि राज्य की विद्युत वितरण व्यवस्था की भी कड़ी परीक्षा ले रही है। प्रदेश में पारा चढ़ने के साथ ही बिजली की मांग ने अब तक के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बिजली की पीक डिमांड रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए 7100 मेगावाट (MW) के जादुई आंकड़े को पार कर गई है। इस अप्रत्याशित उछाल के कारण पावर कंपनियों के ग्रिड और सब-स्टेशनों पर अभूतपूर्व दबाव देखा जा रहा है।
इस बार बिजली संकट गहराने के पीछे सिर्फ चिलचिलाती धूप ही नहीं, बल्कि बदलती लाइफस्टाइल भी एक बड़ी वजह बनकर उभरी है। दुर्ग-भिलाई सहित प्रदेश के कई बड़े शहरों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर (AC), कूलर और पंखों का इस्तेमाल ताबड़तोड़ बढ़ गया है। इसके साथ ही, ऑटोमोबाइल सेक्टर में आए बदलाव के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती संख्या और उनकी लगातार होने वाली चार्जिंग ने पावर ग्रिड के लोड को अचानक कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे ट्रांसफार्मर ओवरहीट होकर ट्रिप हो रहे हैं।
लगातार बढ़ रही इस भारी डिमांड और सप्लाई के बीच के अंतर को पाटने के लिए बिजली विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पीक आवर्स के दौरान मांग की पूर्ति के लिए अन्य राज्यों से बैंकिंग और ओपन एक्सचेंज के जरिए महंगी दरों पर बिजली की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों का अनुमान है कि यदि आने वाले दिनों में नौतपा और गर्मी का प्रकोप इसी तरह जारी रहा, तो यह डिमांड 7500 मेगावाट तक भी पहुंच सकती है। फिलहाल, विभाग की टीमें दिन-रात मुस्तैद रहकर फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्याओं को सुधारने में जुटी हुई हैं।

