पश्चिम एशिया संकट का असर: छत्तीसगढ़ में खरीफ 2026 के लिए नई संतुलित खाद वितरण नीति जारी…NV News

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NV News- पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक संकट और तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर उर्वरकों (खाद) के आयात और आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है। इस संकट से निपटने और राज्य के अन्नदाताओं को खेती के पीक सीजन में खाद की किल्लत से बचाने के लिए छत्तीसगढ़ कृषि विभाग ने कमर कस ली है। विभाग ने आगामी खरीफ सीजन 2026 के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और नई ‘संतुलित खाद वितरण नीति’ जारी कर दी है।

इस नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में सीमांत, लघु और बड़े किसानों के लिए उनकी जोत (जमीन के आकार) के आधार पर अलग-अलग वितरण प्रणाली और कोटा तय किया गया है, ताकि कालाबाजारी पर रोक लगे और हर छोटे-बड़े किसान को जरूरत के मुताबिक खाद मिल सके।

जोत के आधार पर ऐसे मिलेगी खाद (वितरण प्रणाली)

कृषि विभाग द्वारा जारी कड़े दिशा-निर्देशों के अनुसार, सहकारी समितियों और सोसायटियों के माध्यम से खाद का वितरण अब निम्नलिखित श्रेणियों के आधार पर किया जाएगा:

सीमांत किसान (Marginal Farmers): 1 हेक्टेयर (ढाई एकड़) से कम भूमि वाले सीमांत किसानों को प्राथमिकता के आधार पर उनकी फसल की आवश्यकता अनुसार एकमुश्त या दो किस्तों में खाद का कोटा उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें बार-बार सोसायटियों के चक्कर न काटने पड़ें।

लघु किसान (Small Farmers): 1 से 2 हेक्टेयर तक की भूमि वाले लघु किसानों के लिए उनकी बोई जाने वाली फसल (जैसे धान, मक्का, दलहन) के रकबे के आधार पर खाद का निर्धारण होगा। इन्हें कॉपरेटिव सोसायटियों के माध्यम से पावती के आधार पर तय अनुपात में खाद दी जाएगी।

बड़े किसान (Large Farmers): 2 हेक्टेयर (5 एकड़) से अधिक भूमि वाले बड़े और काश्तकार किसानों के लिए वितरण प्रणाली में ‘संतुलित उपयोग’ का नियम कड़ाई से लागू होगा। इन्हें रासायनिक खादों (यूरिया, डीएपी) के साथ एक निश्चित अनुपात में वैकल्पिक या जैविक खादों का उठाव करना भी अनिवार्य किया जा सकता है, ताकि रासायनिक खादों पर निर्भरता और उनकी कमी को नियंत्रित किया जा सके।

संतुलित खाद नीति लागू करने के मुख्य उद्देश्य

कृषि विभाग ने इस आपातकालीन नीति को लागू करने के पीछे कई महत्वपूर्ण तकनीकी और व्यावहारिक कारण बताए हैं:

समान वितरण सुनिश्चित करना: आयात प्रभावित होने से केंद्रीय पूल से मिलने वाले कोटे में संभावित कमी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे कोई भी रसूखदार या बड़ा किसान जरूरत से ज्यादा स्टॉक न कर पाए और छोटे किसानों का हक न मरे।

वैकल्पिक खादों को बढ़ावा: नई नीति में यूरिया और डीएपी (DAP) के अंधाधुंध इस्तेमाल को कम करने और उनके स्थान पर ‘नैनो यूरिया’, ‘नैनो डीएपी’, सुपर फास्फेट (SSP) और पोटाश के संतुलित मिश्रण (N具体K अनुपात) के उपयोग पर जोर दिया गया है।

मिट्टी की सेहत की रक्षा: जरूरत से ज्यादा रासायनिक खादों के उपयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। यह नीति किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से सही मात्रा में ही खाद डालने के लिए प्रेरित करेगी।

कृषि विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों, उप-संचालक कृषि और सहकारी समितियों के प्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बफर स्टॉक की निगरानी करें और नई नीति के अनुसार ही सोसायटियों से पारदर्शी तरीके से वितरण शुरू कराएं।

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