‘चंगाई सभा’ की आड़ में हैवानियत: इलाज के नाम पर बंधक बनाकर युवती की हत्या, आरोपी महिला को उम्रकैद…NV News

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NV News- राजिम। छत्तीसगढ़ के राजिम थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सुरसाबांधा में इलाज और धर्मांतरण की आड़ में एक युवती की जान लेने वाली आरोपी महिला को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ईश्वरी साहू पर आरोप था कि उसने मानसिक रूप से बीमार एक युवती को चंगाई सभा के बहाने बंधक बनाया और उसे गंभीर शारीरिक यातनाएं दीं। अमानवीय प्रताड़ना के कारण युवती की पसलियां टूट गईं और अंततः उसकी दर्दनाक मृत्यु हो गई। इस फैसले ने समाज में अंधविश्वास और इलाज के नाम पर चल रहे ढोंग के खिलाफ कड़ा संदेश दिया है।

घटना मई 2025 की है, जब महासमुंद जिले के पचेड़ा गांव की निवासी योगिता सोनवानी को उसके परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में सुरसाबांधा लेकर आए थे। योगिता मानसिक रूप से बीमार थी और उसका इलाज पहले रायपुर में चल रहा था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिजन उसे वापस गांव ले आए थे। इसी बीच उन्हें राजिम क्षेत्र में कथित ‘चंगाई सभा’ और आध्यात्मिक उपचार के बारे में पता चला। उन्हें उम्मीद थी कि यहाँ उनकी बेटी स्वस्थ हो जाएगी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि वे अपनी बेटी को मौत के मुँह में धकेल रहे हैं।

आरोपी महिला ईश्वरी साहू ने इलाज के बहाने युवती को अपने घर में बंधक बना लिया था। परिजनों का आरोप है कि चंगाई सभा की आड़ में युवती पर न केवल धर्मांतरण का दबाव बनाया गया, बल्कि उसे बुरी तरह पीटा भी गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि युवती की मौत पसलियां टूटने और आंतरिक चोटों के कारण हुई थी। मृतका की माँ सुनीता सोनवानी ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद राजिम पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर मामले की गहन जांच की।

न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ईश्वरी साहू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में इस कृत्य को अत्यंत क्रूर और समाज के लिए घातक बताया। यह मामला न केवल धर्मांतरण के काले खेल को उजागर करता है, बल्कि यह भी चेतावनी देता है कि झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में पड़ना जानलेवा साबित हो सकता है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी बीमारी के लिए केवल प्रमाणित डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों पर ही भरोसा करें।

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