मुआवजा घोटाला: ED की छापेमारी में 66 लाख कैश और 37 किलो चांदी बरामद, 100 करोड़ के पार पहुंचा जालसाजी का आंकड़ा…NV News
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भू-अधिग्रहण मुआवजे में हुए महाघोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। हालिया छापेमारी में ईडी ने प्रदेश के विभिन्न ठिकानों से 66.9 लाख रुपये नकद, 37.13 किलोग्राम चांदी की ईंटें और गहने जब्त किए हैं। जांच में सामने आया है कि इस घोटाले का दायरा अब 100 करोड़ रुपये के पार निकल गया है। रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित जमीनों के मुआवजे में हुई इस गड़बड़ी ने प्रशासन से लेकर रसूखदारों तक हड़कंप मचा दिया है।
ED की टीमों ने रायपुर, अभनपुर, धमतरी और कुरुद सहित कुल 8 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि भू-अधिग्रहण की गोपनीय जानकारी पहले ही दलालों और बड़े कारोबारियों को लीक कर दी गई थी। इन लोगों ने कौड़ियों के दाम पर किसानों से जमीनें खरीदीं और बाद में सरकारी अफसरों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का मुआवजा डकार लिया। छापेमारी में कई डिजिटल डिवाइस और जमीन संबंधी आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग की पुष्टि कर रहे हैं।
इस घोटाले की आंच अब कई रसूखदारों और बड़े अधिकारियों तक पहुंच गई है। सूत्रों के मुताबिक, जांच के घेरे में पूर्व मंत्री के करीबी और कई भू-स्वामी शामिल हैं। ईडी ने पाया है कि प्रारंभिक अनुमान जो 35 से 40 करोड़ रुपये का था, वह अब 11 से अधिक जिलों में फैल चुका है और इसकी कुल राशि 100 करोड़ से कहीं अधिक हो सकती है। जब्त किए गए दस्तावेजों से यह भी संकेत मिले हैं कि फर्जी तरीके से नामों में बदलाव कर मुआवजे की राशि का बंदरबांट किया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय अब उन बैंक खातों और संपत्तियों की जांच कर रहा है, जहाँ घोटाले की रकम निवेश की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित आर्थिक अपराध है, जिसमें राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं। इस कार्रवाई ने विकास परियोजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
