Security Breach – जेल में बंद… फिर भी LIVE! मस्तूरी गोलीकांड के आरोपितों की रील से खुली सिस्टम की पोल…NV News

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NV News – बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर की केंद्रीय जेल एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ गई है। जेल की सख्त सुरक्षा व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए मस्तूरी गोलीकांड के आरोपितों ने जेल के भीतर से न केवल मोबाइल का उपयोग किया, बल्कि सोशल मीडिया पर ‘लाइव’ आकर अपनी रील भी वायरल कर दी है। इस वीडियो के सामने आने के बाद जेल प्रशासन और स्थानीय सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जो अपराधी सलाखों के पीछे अपनी सजा काट रहे हैं, उनका इस तरह बेखौफ होकर इंटरनेट का इस्तेमाल करना जेल मैन्युअल और कानून की धज्जियां उड़ाने जैसा है।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि मस्तूरी गोलीकांड के मुख्य आरोपित जेल के भीतर मोबाइल फोन थामे हुए बड़े आराम से रील बना रहे हैं और उसे इंटरनेट पर अपलोड कर रहे हैं। आरोपितों के चेहरे पर कानून का कोई डर नजर नहीं आ रहा है, बल्कि वे जेल के भीतर से अपनी धौंस जमाते दिख रहे हैं। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, बिलासपुर के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जैमर और कड़े पहरे के बावजूद जेल के भीतर मोबाइल कैसे पहुंचा और अपराधियों को इसे चलाने की छूट किसने दी।

इस घटना ने बिलासपुर केंद्रीय जेल की कार्यप्रणाली और सुरक्षा जांच पर गहरी चोट की है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब जेल के भीतर प्रतिबंधित वस्तुएं मिलने की खबर आई हो, लेकिन लाइव वीडियो और रील बनाने जैसी घटना ने भ्रष्टाचार और लापरवाही की पराकाष्ठा को उजागर कर दिया है। मस्तूरी गोलीकांड जैसे संगीन अपराध के आरोपितों का इस तरह सक्रिय होना जेल प्रहरियों और उच्चाधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। फिलहाल, उच्च स्तर पर जांच की बात कही जा रही है, लेकिन जेल की दीवारों के पीछे चल रहा यह खेल अब जनता के सामने आ चुका है।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस और जेल विभाग के अधिकारियों ने आनन-फानन में मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। बताया जा रहा है कि जेल के भीतर तलाशी अभियान भी चलाया गया, लेकिन सवाल यह बना हुआ है कि क्या यह कार्रवाई केवल दिखावा है या भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगेगी। मस्तूरी गोलीकांड के पीड़ितों और उनके परिजनों में भी इस घटना के बाद डर और नाराजगी का माहौल है। जब अपराधी जेल के भीतर से दुनिया से जुड़ सकते हैं, तो वे बाहर मौजूद गवाहों और सबूतों को भी आसानी से प्रभावित कर सकते हैं, जो न्याय प्रक्रिया के लिए एक बड़ा खतरा है।

इस पूरे प्रकरण ने छत्तीसगढ़ की जेल व्यवस्था की सुरक्षा पर एक बड़ा दाग लगा दिया है। बिलासपुर पुलिस अब उन मोबाइल फोनों और इंटरनेट कनेक्शन के स्रोत का पता लगाने की कोशिश कर रही है जिसका उपयोग इन अपराधियों ने किया था। नागरिकों का कहना है कि जब तक जेल के भीतर मौजूद काली भेड़ों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अपराधी इसी तरह कानून का मजाक उड़ाते रहेंगे। अब देखना होगा कि जेल प्रशासन इस गंभीर चूक के लिए किन पर गाज गिराता है और क्या जेलों में मोबाइल के इस्तेमाल पर वास्तव में प्रतिबंध लग पाएगा।

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