रक्षक बना भक्षक: युवा बाघ के शिकार मामले में डिप्टी रेंजर गिरफ्तार, शिकारी गिरोह के साथ मिलकर रची थी साजिश…NV News
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जगदलपुर। बस्तर के इंद्रावती और बीजापुर के जंगलों की खामोशी के पीछे एक खौफनाक सच छिपा था, जिसका अब खुलासा हो गया है। एक युवा बाघ की मौत के मामले में जांच कर रही टीम के होश तब उड़ गए जब इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कोई बाहरी शिकारी नहीं, बल्कि वन विभाग का एक डिप्टी रेंजर निकला। सरकारी तंत्र में ऊंचे पद पर बैठे इस अधिकारी ने अपनी वर्दी की गरिमा को ताक पर रखकर अंतरराष्ट्रीय शिकारी गिरोह के साथ हाथ मिलाया और जंगल के राजा की दहाड़ को हमेशा के लिए शांत कर दिया।
वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में यह बात सामने आई है कि डिप्टी रेंजर ने शिकारियों को बाघ की लोकेशन और मूवमेंट की सटीक जानकारी मुहैया कराई थी। गिरोह ने बड़ी ही चालाकी से बाघ का शिकार किया और उसके अंगों की तस्करी की योजना बनाई। रक्षक के इस भक्षक अवतार ने न केवल वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि विभाग के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार के नेटवर्क की पोल भी खोल दी है। इस मामले में अब तक कई अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।
जांच दल के अनुसार, आरोपी अधिकारी पिछले काफी समय से शिकारियों के संपर्क में था और उन्हें गश्त (Patrolling) के समय और रास्तों की गुप्त जानकारी देता था ताकि वे आसानी से अपने मंसूबों को अंजाम दे सकें। इस घटना के बाद पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया है। मुख्यालय ने आरोपी डिप्टी रेंजर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जब विभाग के भीतर ही ऐसे तत्व मौजूद हों, तो बेजुबान जानवरों को बचा पाना नामुमकिन है।
सोशल मीडिया और पर्यावरण संगठनों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मांग की जा रही है कि आरोपी अधिकारी को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बने, ताकि भविष्य में कोई और रक्षक ऐसी गद्दारी करने की हिम्मत न कर सके। फिलहाल, बाघ के अवशेषों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इस घटना ने छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
