सुपेबेड़ा में 2 साल बाद राहत की दस्तक: AIIMS के नेफ्रोलॉजिस्ट की टीम ने लगाया स्वास्थ्य शिविर, किडनी रोगों से जूझ रहे 100 ग्रामीणों की हुई जांच…NV News

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गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम सुपेबेड़ा में लगभग दो वर्षों के लंबे अंतराल के बाद विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। यह गांव पिछले कई वर्षों से किडनी की रहस्यमयी बीमारी के कारण चर्चा में रहा है, जहां दर्जनों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ग्रामीणों की लगातार मांग और स्वास्थ्य विभाग की पहल पर रायपुर एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञ नेफ्रोलॉजिस्ट (Nephrologist) की टीम गांव पहुंची। शिविर की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अपना परीक्षण कराने के लिए एकत्रित हुए।

स्वास्थ्य शिविर के दौरान एम्स की टीम ने 100 से अधिक ग्रामीणों का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसमें किडनी की स्थिति का आकलन करने के लिए मरीजों के रक्त और पेशाब (Blood and Urine) के नमूने लिए गए। डॉक्टरों ने बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य बीमारी की शुरुआती स्टेज में पहचान करना और पहले से ग्रसित मरीजों के उपचार की समीक्षा करना है। एम्स के विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को नियमित दवाइयां लेने और पानी की शुद्धता को लेकर भी विशेष सलाह दी है।

सुपेबेड़ा के ग्रामीणों ने स्वास्थ्य शिविर लगने पर संतोष व्यक्त किया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस तरह के शिविर नियमित अंतराल पर होने चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले दो सालों में स्वास्थ्य सेवाओं में कमी आई थी, जिसके कारण कई मरीजों की स्थिति बिगड़ गई थी। शिविर में पहुंचे जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि अब सुपेबेड़ा के मरीजों की निगरानी के लिए एक विशेष चार्ट तैयार किया गया है और दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुपेबेड़ा में किडनी की समस्या के पीछे मिट्टी और पानी में मौजूद भारी धातुओं (Heavy Metals) का होना एक बड़ा कारण हो सकता है। शिविर के दौरान एम्स की टीम ने कुछ नए मरीजों में भी प्रारंभिक लक्षण पाए हैं, जिन्हें आगे के इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। इस शिविर से न केवल मरीजों को घर के पास इलाज मिला है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के पास अब बीमारी की वर्तमान स्थिति का नया डेटा भी उपलब्ध होगा।

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