छत्तीसगढ़ विधानसभा: गिग वर्करों की सुरक्षा पर अजय चंद्राकर के तीखे सवाल, सरकार बोली- ‘केंद्र के नियमों का है इंतजार’…NV News

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान पूर्व मंत्री और कुरूद विधायक अजय चंद्राकर ने राज्य में तेजी से बढ़ते ‘गिग इकोनॉमी’ और उससे जुड़े कर्मचारियों की सुरक्षा का मामला प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करने वाले लाखों युवाओं के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार क्या कदम उठा रही है।

अजय चंद्राकर के प्रमुख तर्क:

शोषण का मुद्दा: चंद्राकर ने कहा कि नियमावली के अभाव में इन वर्करों का ‘अमानवीय शोषण’ हो रहा है। कंपनियों के टारगेट और तेज डिलीवरी के दबाव में ये युवा अपनी जान जोखिम में डालकर वाहन चलाते हैं।

श्रेणी का निर्धारण: उन्होंने सवाल किया कि सरकार इन कर्मियों को ‘असंगठित’ मानती है या ‘संगठित’, क्योंकि वर्तमान में इनके पास किसी भी श्रेणी की कानूनी सुरक्षा नहीं है।

राज्य की पहल: उन्होंने मांग की कि छत्तीसगढ़ सरकार को अन्य प्रगतिशील राज्यों की तर्ज पर अपने स्तर पर ‘गिग वर्कर सुरक्षा अधिनियम’ बनाने पर विचार करना चाहिए।

सरकार का पक्ष: केंद्र की राह देख रही साय सरकार

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए स्वीकार किया कि गिग वर्कर वर्तमान में किसी निश्चित श्रेणी (संगठित/असंगठित) में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं। उन्होंने सदन को निम्नलिखित जानकारी दी:

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020: केंद्र सरकार ने ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’ में गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को शामिल किया है।

नियमों का इंतजार: मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा इन संहिताओं (Labour Codes) के तहत अंतिम नियम अधिसूचित (Notify) किए जाने बाकी हैं। राज्य सरकार केंद्र के इन दिशानिर्देशों का इंतजार कर रही है ताकि पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।

समिति का गठन: उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर एक समिति इन वर्करों की कार्यस्थितियों का अध्ययन कर रही है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र के नियमों के बाद ही लिया जाएगा।

गिग वर्करों के लिए संभावित सुरक्षा लाभ

केंद्र के नियम लागू होने के बाद गिग वर्करों को निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:

बीमा कवर: दुर्घटना और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा।

पेंशन और ग्रेच्युटी: सामाजिक सुरक्षा कोष के माध्यम से भविष्य की सुरक्षा।

कार्य घंटे: काम करने के घंटों और न्यूनतम भुगतान का निर्धारण।

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