कवासी लखमा जेल से रिहा: 379 दिन बाद बाहर आए पूर्व आबकारी मंत्री, समर्थकों ने गोंडी डांस और नारों के साथ किया भव्य स्वागत…NV News
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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पिछले एक साल से अधिक समय से जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा बुधवार शाम रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को दी गई अंतरिम जमानत के बाद आज जेल प्रशासन ने कागजी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें रिहा किया। लखमा की रिहाई की खबर मिलते ही जेल के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और उनके समर्थक जुट गए थे, जिन्होंने आतिशबाजी और नारों के साथ उनका स्वागत किया।
कवासी लखमा लगभग 379 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहे। उनकी रिहाई के समय बस्तर से आए समर्थकों ने पारंपरिक गोंडी नृत्य (Gondi Dance) पेश कर उत्सव जैसा माहौल बना दिया। समर्थकों के भारी उत्साह के बीच लखमा ने जेल से बाहर निकलते ही हाथ जोड़कर सबका अभिवादन स्वीकार किया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 15 जनवरी 2025 को शराब घोटाले में कथित संलिप्तता और कमीशनखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे जेल में थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कवासी लखमा को अंतरिम जमानत देते हुए कुछ बेहद सख्त शर्तें भी लागू की हैं। अदालत के आदेश के अनुसार, लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहना होगा। वे केवल कोर्ट की पेशी या कानूनी प्रक्रियाओं के लिए ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे। इसके अलावा उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना सक्रिय मोबाइल नंबर व रहने का पता जांच एजेंसियों को देना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लंबी जांच प्रक्रिया और गवाहों की विशाल संख्या (लगभग 1,193 गवाह) का हवाला देते हुए लखमा की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी। अदालत ने माना कि ट्रायल पूरा होने में अभी काफी समय लग सकता है, ऐसे में अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं है। ईडी का आरोप है कि लखमा शराब सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे और उन्हें प्रति माह करोड़ों रुपये का कमीशन मिलता था।
कांग्रेस पार्टी ने लखमा की रिहाई को सत्य की जीत बताया है। जेल से बाहर आने के बाद कवासी लखमा सीधे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए, क्योंकि अदालती आदेश के अनुसार उन्हें राज्य से बाहर रहना है। इस रिहाई ने आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों के लिए नई जमीन तैयार कर दी है, विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में जहां लखमा का काफी प्रभाव माना जाता है। फिलहाल, शराब घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू (EOW) और ईडी दोनों स्तरों पर जारी है।
