Foreign brands Controversy in the “Swadeshi Sankalp Daud”: स्वदेशी संकल्प दौड़” में विदेशी ब्रांड का विवाद, GAP की टी-शर्ट पहनकर पहुंचे मंत्री टंकराम वर्मा, राष्ट्रवाद पर उठे सवाल- NV News
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N.V.News रायपुर: Foreign brands Controversy in the “Swadeshi Sankalp Daud” छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में आयोजित “स्वदेशी संकल्प दौड़” (Swadeshi Sankalp Daud) उस वक्त विवादों में आ गई, जब कार्यक्रम का शुभारंभ करने पहुंचे मंत्री टंकराम वर्मा (Minister Tankram Verma) की टी-शर्ट को लेकर सवाल खड़े हो गए। स्वदेशी के नाम पर आयोजित इस आयोजन में मंत्री जी विदेशी कपड़ा ब्रांड GAP की टी-शर्ट पहने नजर आए, जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
GAP एक अमेरिकी कपड़ा कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1969 में डोनाल्ड और डोरिस फिशर ने सैन फ्रांसिस्को, कैलिफ़ोर्निया में की थी। ऐसे में स्वदेशी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में विदेशी ब्रांड(Foreign Brand) का इस्तेमाल होना कई लोगों को खटक गया। सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होते ही सवाल उठने लगे कि क्या यही “स्वदेशी संकल्प” की असली तस्वीर है?

आलोचकों का कहना है कि जब आम जनता से स्वदेशी अपनाने, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने और राष्ट्रवाद के नाम पर त्याग करने की अपेक्षा की जाती है, तब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को भी उसी मानक पर खरा उतरना चाहिए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ लेते हुए मंत्री पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया है।

कुछ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंत्री टंकराम वर्मा पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि “जो लोग मंचों से अखंड भारत, राष्ट्रवाद और स्वदेशी के गुणगान करते नहीं थकते, वही लोग व्यवहार में विदेशी ब्रांड को अपनाए हुए हैं।” वहीं कुछ लोगों ने मंत्री को “गोडसे विचारधारा से जुड़ा हुआ” बताने जैसे आरोप भी लगाए हैं, हालांकि इस पर मंत्री की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भाजपा समर्थकों का एक वर्ग इस विवाद को “अनावश्यक मुद्दा” बताते हुए कह रहा है कि कपड़े के ब्रांड से किसी की राष्ट्रभक्ति नहीं नापी जा सकती। उनका तर्क है कि कार्यक्रम का उद्देश्य महत्वपूर्ण था और उसे कपड़ों से जोड़कर देखना सही नहीं है।
हालांकि सवाल यही है कि जब सरकार और उसके मंत्री स्वदेशी के नाम पर अभियान चलाते हैं, तो क्या उन्हें खुद उदाहरण नहीं प्रस्तुत करना चाहिए? क्या विदेशी कपड़े पहनकर स्वदेशी की दौड़ को हरी झंडी दिखाना जनता को भ्रमित नहीं करता?
फिलहाल यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में गर्माया हुआ है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। जनता अब सिर्फ नारों से नहीं, बल्कि आचरण से भी जवाब चाहती है।
