महिला दिवस 2026: बांस की टोकरी बुनकर बदली गांव की तस्वीर, अपनी मेहनत की कमाई से दान कीं 10 हजार पुस्तकें, टीवी और कंप्यूटर…NV News

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव से संघर्ष और सफलता की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने नारी शक्ति की नई परिभाषा गढ़ी है। एक साधारण महिला, जो आजीविका के लिए बांस की टोकरियां बुनती है, उसने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से वह कर दिखाया है जो बड़े-बड़े धनकुबेर नहीं कर पाते। बांस की तीलियों के बीच अपना भविष्य तलाशते हुए इस महिला ने न केवल अपने परिवार को पाला, बल्कि गांव के बच्चों की शिक्षा के लिए 10 हजार से अधिक पुस्तकें, आधुनिक टीवी और कंप्यूटर सेट दान किए हैं। उनकी इस निस्वार्थ सेवा ने गांव के सरकारी स्कूल को एक आधुनिक ज्ञान केंद्र में बदल दिया है।

यह प्रेरक सफर इतना आसान नहीं था। तड़के सुबह से लेकर देर रात तक टोकरियां बुनकर उन्होंने एक-एक पैसा जोड़ा। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने अपनी सुख-सुविधाओं के बजाय इन पैसों को स्कूल में क्यों लगाया, तो उनका कहना था कि “शिक्षा ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे हमारे गांव के बच्चे गरीबी के चक्र से बाहर निकल सकते हैं।” उनकी इस पहल से आज गांव के बच्चे डिजिटल शिक्षा से जुड़ रहे हैं और उनके पास पढ़ने के लिए किताबों का एक विशाल भंडार उपलब्ध है। महिला के इस समर्पण को देख अब पूरा गांव और प्रशासन भी उनकी सराहना कर रहा है।

बांस की टोकरी बुनने वाली इस ‘शिक्षा दूत’ का सपना यहीं खत्म नहीं होता। उनका अगला लक्ष्य अपने गांव में एक कॉलेज खुलवाना है, ताकि यहां की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए मीलों दूर शहर न जाना पड़े। उनका मानना है कि जब गांव में ही कॉलेज होगा, तो कोई भी प्रतिभा आर्थिक तंगी या दूरी की वजह से पढ़ाई नहीं छोड़ेगी। महिला दिवस पर उनकी यह कहानी हमें सिखाती है कि इरादे मजबूत हों और नेक हों, तो संसाधनों की कमी कभी भी बदलाव के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती।

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