विधानसभा शीतकालीन सत्र: विजन डॉक्यूमेंट 2047 पर गरमाई बहस, अजय चंद्राकर ने उठाए सवाल
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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार से शुरू हो गया। सत्र के पहले ही दिन सदन में विजन डॉक्यूमेंट 2047 को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। कार्यवाही की शुरुआत वित्त मंत्री ओपी चौधरी के संबोधन से हुई, जिसके बाद विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विजन डॉक्यूमेंट 2047 पर चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में बना एल्यूमिनियम आज चंद्रयान और मंगलयान से लेकर तेजस फाइटर जेट और कई रॉकेटों में इस्तेमाल हो रहा है। प्रदेश में बनी रेल पटरियां देशभर में बिछाई जा रही हैं। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सदन में प्रोजेक्टर लगाने की मांग की, ताकि ऑडियो-वीडियो और ग्राफ के माध्यम से बेहतर प्रेजेंटेशन दिया जा सके।
इसके बाद विधायक अजय चंद्राकर को चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत प्रसिद्ध सूफी कवि रूमी की कविता से की और विजन डॉक्यूमेंट 2047 को लेकर कई बिंदुओं पर सरकार को घेरा। अजय चंद्राकर ने कहा कि विजन डॉक्यूमेंट में गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और कानून व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि नीतियां बनती हैं तो उनका ज़मीन पर प्रतिबिंब भी दिखना चाहिए।
रोजगार के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि रोजगार की सरकार की परिभाषा क्या है। सरकार को तय करना चाहिए कि रोजगार किसे माना जाए, क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
कृषि क्षेत्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने सिंचाई के आंकड़ों पर सवाल उठाए। अजय चंद्राकर ने कहा कि वर्ष 2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण में सिंचाई का प्रतिशत 37 बताया गया था, जबकि 2024-25 के आर्थिक सर्वेक्षण में यह घटकर 34 प्रतिशत रह गया। उन्होंने पूछा कि अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद सिंचाई का प्रतिशत कैसे घट गया।
बीज और दुग्ध उत्पादन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य किसी भी तरह के बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं है। दुग्ध उत्पादन में प्रदेश का योगदान मात्र 6 से 7 प्रतिशत है और चारा उत्पादन के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन, अंडा उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे एलाइड सेक्टर में गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
अजय चंद्राकर ने क्षेत्रीय वित्तीय असंतुलन को भी बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि रायगढ़, कोरबा और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में भारी फंड मौजूद है, लेकिन बाकी जिलों के लिए संसाधन कैसे आएंगे, इस पर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 97 प्रतिशत आबादी के लिए ठोस नीति की जरूरत है।
इस दौरान मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने खड़े होकर अध्यक्ष से आपत्ति जताई और व्यक्तिगत आरोप लगाने का विरोध किया। उन्होंने आरोपित अंश को विलोपित करने की मांग की। इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि उन्हें सदन के नियम न सिखाए जाएं। जवाब में मंत्री जायसवाल ने कहा कि वह भी दो बार के विधायक हैं और नियम-प्रक्रिया से भली-भांति परिचित हैं।
अपने संबोधन के अंत में अजय चंद्राकर ने एनीमिया उन्मूलन को अभियान में शामिल करने की मांग की। उन्होंने मेकाहारा अस्पताल में पेट स्कैन मशीन की खरीदी का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मध्य भारत का सबसे बड़ा कैंसर अस्पताल बनाना था। यदि इसमें किसी तरह का भ्रष्टाचार साबित होता है तो वे सजा भुगतने को तैयार हैं।
