ईरान पर ‘महाप्रहार’ की तैयारी: अमेरिका आज लॉन्च करेगा अब तक का सबसे बड़ा स्ट्राइक पैकेज…NV News
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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिकी रक्षा सचिव (Secretary of War) पीट हेगसेथ ने एक चौंकाने वाला एलान किया है। हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका आज ईरान पर अपना “अब तक का सबसे बड़ा स्ट्राइक पैकेज” (Largest Strike Package) लॉन्च करने जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह हमला पहले से चल रहे सैन्य ऑपरेशनों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान के सैन्य ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करना है। इस बयान के बाद पूरी दुनिया की नजरें अब खाड़ी देशों और ईरान पर टिक गई हैं।
7,000 ठिकानों को बनाया निशाना, अब ‘डेथ एंड डिस्ट्रक्शन’ का प्लान
रक्षा सचिव हेगसेथ ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना अब तक ईरान के 7,000 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बना चुकी है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, “हम आसमान से मौत और तबाही बरसा रहे हैं।” अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं, लॉन्चर्स, रक्षा औद्योगिक आधार और उसकी नौसेना को पूरी तरह खत्म करना है। जनरल डैन केन के साथ साझा ब्रीफिंग में उन्होंने बताया कि अमेरिकी विमान अब ईरानी क्षेत्र में और अधिक गहराई तक जाकर स्ट्राइक कर रहे हैं।
युद्ध के बजट में भारी बढ़ोतरी: 200 बिलियन डॉलर की मांग
खबरों के मुताबिक, इस भीषण युद्ध को जारी रखने के लिए पेंटागन ने कांग्रेस से अतिरिक्त 200 बिलियन डॉलर के बजट की मांग की है। बजट पर पूछे गए सवाल के जवाब में हेगसेथ ने दोटूक कहा, “बुरे लोगों को मारने के लिए पैसे लगते हैं।” उन्होंने यह भी साफ किया कि इस ऑपरेशन को खत्म करने की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है, और सब कुछ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजना के अनुसार चल रहा है। अमेरिका का दावा है कि इस कार्रवाई से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता 90% तक गिर गई है।
दुनिया भर में हड़कंप, तेल की कीमतों में उछाल
अमेरिका और इजरायल के इस संयुक्त सैन्य अभियान ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। ईरान द्वारा जवाबी कार्रवाई की धमकी और बुनियादी ढांचे पर हमलों के बाद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। जहाँ एक तरफ ईरान ‘जीरो रिस्ट्रेंट’ (कोई संयम नहीं) की चेतावनी दे रहा है, वहीं अमेरिका ने साफ कर दिया है कि यह युद्ध उनकी अपनी शर्तों पर ही खत्म होगा। इस ‘महा-स्ट्राइक’ के एलान ने तीसरे विश्व युद्ध जैसी आशंकाओं को और गहरा कर दिया है।
